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पलामू के 13 बाल विकास परियोजना चल रहा प्रभार में, कार्य प्रभावित

Updated at : 31 Jul 2025 5:06 PM (IST)
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पलामू के 13 बाल विकास परियोजना चल रहा प्रभार में, कार्य प्रभावित

पलामू जिला समाज कल्याण विभाग पदाधिकारियों व महिला पर्यवेक्षिकाओं की कमी झेल रहा है.

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14 में मात्र एक सीडीपीओ पदस्थापित, 85 पर्यवेक्षिका के जगह 29 कार्यरत राकेश पाठक, मेदिनीनगर पलामू जिला समाज कल्याण विभाग पदाधिकारियों व महिला पर्यवेक्षिकाओं की कमी झेल रहा है. इस कारण विभाग का काम काज प्रभावित हो रहा है. जानकारी के मुताबिक समेकित बाल विकास योजना के तहत पलामू जिले में 14 परियोजना संचालित हैं. इन सभी परियोजनाओं के अधीन जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 2625 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. प्रावधान के अनुसार सरकार ने बाल विकास परियोजना के सफल संचालन व कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सीडीपीओ व महिला पर्यवेक्षिका का पद सृजित है. प्रत्येक परियोजना के लिए एक सीडीपीओ का पद सृजित है, लेकिन जिले के सिर्फ छतरपुर बाल विकास परियोजना में शीला कुमारी सीडीपीओ के पद पर पदस्थापित हैं. शेष 13 परियोजना में सीडीपीओ का पद रिक्त है. रिक्त पदों पर संबंधित प्रखंड के बीडीओ या सीओ बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के प्रभार में है. स्थिति यह है कि बीडीओ या सीओ अपने विभागीय कार्य में व्यस्त रहते हैं. इस कारण वे बाल विकास परियोजना कार्यों का निष्पादन सुचारू रूप से नही कर पाते. इस परियोजना के प्रभार में बीडीओ या सीओ है वे कार्यालय का कार्य तो निपटा देते है. लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण व सरकार के द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं का कार्य प्रभावित हो जाता है. इस तरह बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की कमी के कारण जिले में समाज कल्याण विभाग का काम प्रभावित हो रहा है. जिले में सीडीपीओ के पद का प्रभार पिछले कई वर्षों से चल रहा है. 29 महिला पर्यवेक्षिका को 85 सेक्टर की जिम्मेवारी इसी तरह जिले में महिला पर्यवेक्षिकाओं की भी कमी है. जिले के सभी 2625 आंगनबाड़ी केंद्रों को 85 सेक्टर में विभक्त किया गया है. आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निरीक्षण व कार्यों की निगरानी की सुविधा के लिए यह प्रावधान किया गया है. लेकिन जिले में जरूरत के मुताबिक महिला पर्यवेक्षिका पदस्थापित नही है. फिलहाल पलामू जिले में 29 महिला पर्यवेक्षिका कार्यरत है. इन्हें 85 सेक्टर की जिम्मेवारी दी गयी है. एक-एक महिला पर्यवेक्षिका दो से तीन सेक्टर के प्रभार में है. इस वजह से आंगनबाडी केंद्रों का मॉनिटरिंग करने में परेशानी होती है. सरकार ने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से कई तरह की योजना संचालित की है. जरूरतमंदों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में विभाग काम तो करता है. लेकिन सीडीपीओ व महिला पर्यवेक्षिका की कमी के कारण या तो लक्ष्य की प्राप्ति नही हो पाती है या समय पर काम पूरा नही हो पाता है. जिले के हरिहरगंज, पाटन, हुसैनाबाद, हैदरनगर, मनातू, तरहसी, पांकी, लेस्लीगंज, चैनपुर, विश्रामपुर, डालटनगंज (शहरी) व डालटनगंज ग्रामीण बाल विकास परियोजना में सीडीपीओ का पद रिक्त है. इन परियोजनाओं में सीडीपीओ के पद पर बीडीओ या सीओ प्रभार में है. परेशानी है, फिर भी काम चला रहे हैं : नीता चौहान जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान ने बताया कि सीडीपीओ व महिला पर्यवेक्षिका के कई पद रिक्त हैं. इस कारण विभागीय कार्य को पूरा करने में परेशानी हो रही है. फिर भी किसी तरह सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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