लेफ्टिनेंट की बातों को याद करके बिलख पड़े परिजन

मेदिनीनगर : मई महीने में ही लेफ्टिनेंट अनुराग शुक्ला को घर आना था. अनुराग की दादी को एकादशी व्रत पर बैठना था. इसे लेकर बड़ा आयोजन होना था. तैयारी चल रही थी. कुछ ही दिन पहले अनुराग के पिता जितेंद्र शुक्ला जब रांची से सिंगरा खुर्द आये थे, तो घर के सदस्यों को कहा था […]
मेदिनीनगर : मई महीने में ही लेफ्टिनेंट अनुराग शुक्ला को घर आना था. अनुराग की दादी को एकादशी व्रत पर बैठना था. इसे लेकर बड़ा आयोजन होना था. तैयारी चल रही थी. कुछ ही दिन पहले अनुराग के पिता जितेंद्र शुक्ला जब रांची से सिंगरा खुर्द आये थे, तो घर के सदस्यों को कहा था कि ठीक से तैयारी करनी है.
काफी भीड़ लगेगी. क्योंकि मां की उम्र हो गयी है. उत्सव होना चाहिए, ताकि उसे खुशी लगे. क्योंकि उसका पोता लेफ्टिनेंट हो गया है. इस अवसर पर भी खुशी साथ में ही हो जायेगी. पर किसी को क्या पता था कि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. इस बात की चर्चा कर गांव के संतोष शुक्ला रो पड़ते हैं.
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