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पाकुड़ में मांझी परगना महासम्मेलन में गरजे चंपाई सोरेन- संताल परगना से घुसपैठियों निकाल फेंकेंगे

Updated at : 03 Oct 2024 8:25 PM (IST)
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Champai Soren

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Jharkhand Politics: पाकुड़ में आयोजित मांझी परगना महासम्मेलन में चंपाई सोरेन ने बांग्लादेशी घुसपैठ पर हुंकार भरी. कहा- संताल परगना से घुसपैठियों निकाल फेंकेंगे

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Jharkhand Politics: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सोमवार (3 अक्टूबर) को पाकुड़ के मांझी परगना महासम्मेलन में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया. उन्होंने कहा कि संताल परगना से बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल फेंकेंगे. साथ ही आश्वासन दिया कि आदिवासियों से छीनी गई जमीन पर फिर से उनको कब्जा दिलवाएंगे.

हम आदिवासी दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता – चंपाई सोरेन

पाकुड़ के शहरकोल पंचायत के गोकुलपुर हाट मैदान में आदिवासी समाज की ओर से आयोजित मांझी परगना महासम्मेलन में उन्होंने ये बातें कहीं. चंपाई सोरेन ने कहा कि हम आदिवासी दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता से हैं. आदिवासियों ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा. हमारे समाज ने किसी भी हाल में किसी के भी सामने घुटने नहीं टेके. उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ संताल परगना की मिट्टी से ही पहला विद्रोह हुआ था.

संतालियों के विद्रोह की वजह से बना एसपीटी एक्ट

चंपाई सोरेन ने कहा कि संताल परगना की इसी धरती पर बाबा तिलका मांझी, वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो जैसी क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की हुकूमत को चुनौती दी थी. उनकी वजह से ही संताल परगना कास्तकारी अधिनियम बना था. उन्होंने कहा कि जिस माटी में जन्मे हमारे पूर्वजों ने अपनी जमीन और आत्मसम्मान के लिए अंग्रेजों से युद्ध किया था, वहां हम किसी भी घुसपैठिए को रहने नहीं देंगे.

दर्जनों गांवों से आदिवासियों का नाम-ओ-निशान मिट गया

भाजपा नेता ने कहा कि हम आदिवासियों को सीधा-सरल माना जाता है. जब बात अस्तित्व की आती है, तो हमारा समाज किसी भी हद तक जाने को तैयार है. कहा कि ये घुसपैठिए हमारी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं. हमारी बहू-बेटियों की अस्मत खतरे में है. दर्जनों गांवों से आदिवासियों का नाम-ओ-निशान मिट चुका है.

बैसी बुलाकर लोगों को वापस करेंगे उनकी जमीन

चंपाई सोरेन ने कहा कि हमारे समाज के पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की मदद से, हमलोग बैसी बुलाकर, उन सभी लोगों को उनका मकान और उनकी जमीनें वापस दिलवाएंगे, जिनकी जमीन पर घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया है. कहा कि संताल परगना कास्तकारी अधिनियम के बावजूद इन गांवों से आदिवासी उजड़ गये, क्योंकि हमारी मांझी परगना व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया. हमारा प्रयास है कि आदिवासी समाज की इस स्वशासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाये.

आदिवासी समुदाय के लोगों को जागरूक करने निकला हूं

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम चुके चंपाई सोरेन ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से कई आदिवासी गांवों का अस्तित्व ही संकट में आ गया है. मैं अपने समुदाय के लोगों को यह बताने निकला हूं. उनको बता रहा हूं कि आपकी जमीनें लूटी जा रहीं हैं. ये जमीन लूटने वाले लोग कहां से आ रहे हैं? यहां आप अपनी जमीन नहीं बेच सकते, लेकिन गांवों का अस्तित्व खत्म हो रहा है. इसलिए मैं अपने आदिवासी भाईयों को जागरूक करने के लिए निकला हूं.

मांझी परगना और बैसी संताल परगना ने बुलाया था महासम्मेलन

मांझी परगना एवं बैसी संताल परगना द्वारा आयोजित महासम्मेलन में भाग लेने के पहले पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस कार्यक्रम को पूर्व विधायक लोबिन हेम्ब्रम के साथ-साथ ग्राम प्रधानों ने भी संबोधित किया.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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