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बलियापतरा के किसान दो कट्ठा में स्ट्रॉबेरी की खेती कर बन रहे आत्मनिर्भर

महेशपुर और उसके आसपास के गांव बलियापतरा में स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है.

महेशपुर. महेशपुर और उसके आसपास के गांव बलियापतरा में स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है. लोग इसके स्वाद के लोग दीवाने होते जा रहे हैं. बलियापतरा गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती कर जहां किसान आत्मनिर्भर हो रहे हैं. कभी ठंडे इलाके के फल स्ट्रॉबेरी अब महेशपुर के इलाकों में भी उपजाई जाने लगी है. बलियापतरा गांव के किसान सौदागर सिंह ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है. वे अपने दो कट्टा खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती की है. इन पौधों में अब चटक लाल रंग के स्ट्रॉबेरी बरी फल रहे हैं और खेतों की सुंदरता बढ़ा रहे हैं. सौदागर सिंह इन दिनों स्ट्रॉबेरी के फल को प्रत्येक दिन तुड़ाई कर रहे हैं. महेशपुर मार्केट के फल दुकानों तक पहुंचा रहे हैं. उन्होंने बताया कि 500 से 600 सौ रुपये प्रति किलो स्ट्रॉबेरी बिक रहा है. किसान ने बताया कि वे पिछले वर्ष प्रशिक्षण व भ्रमण के लिए संस्था के माध्यम से रांची गये थे. रांची भ्रमण के दौरान वहां के खेतों में स्ट्रॉबेरी की फसल देखी थी, जिससे प्रेरित होकर मैंने इसकी खेती करने का निर्णय लिया. वहां के किसान व विभाग के अधिकारियों से इसकी खेती के बारे में पूरी जानकारी ली. इसके बाद जेएसएलपीएस के माध्यम से स्ट्रॉबेरी का बीज मिला. मैंने पहली बार अपने दो कट्ठा खेत में नवंबर 2024 को स्ट्रॉबेरी लगवाया. पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती करने में कुछ परेशानियां भी आई. कई किसानों ने उपहास उड़ाया, लेकिन मेरा प्रयोग सफल रहा. अब स्ट्रॉबेरी का फल आमदनी देने लगा है. उन्होंने बताया कि यहां पर पानी पटाने को लेकर मुश्किलें आ रही है. यहां खेती के लिए बड़ा पंप सेट चाहिए, ताकि फसल में जल्दी पानी पटा सकें. बताया कि भविष्य में बड़े पैमाने पर इसकी खेती करने की योजना है. यदि इस योजना में विभाग का सहयोग मिलता रहा तो हम किसान की तकदीर बदल जायेगी. यह ठंड के मौसम में बेहतरीन कमाई देने वाला फसल है. अन्य किसान भी इसकी खेती कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. वहीं, किसान की पत्नी उगन्ति देवी ने बताया कि वे भी जेएसएलपीएस से जुड़ी हुई हैं. इस स्ट्रॉबेरी की खेती में पौधा, तकनीक व सिंचाई की सुविधा जेएसएलपीएस के माध्यम से कराया गया है. बताया कि वे अपने पति के साथ-साथ बच्चे भी इस खेती में हाथ बंटाते हैं. नवंबर 2024 को स्ट्रॉबेरी का पौधा लगाया गया था. दो महीने के अंदर ही फल निकल गया और स्ट्रॉबेरी को बेचने के लिए बाजार में जाने का मौका ही नहीं लग पाता है, क्योंकि ज्यादातर स्ट्रॉबेरी खेत से ही बिक जाते हैं. बताया कि स्ट्रॉबेरी के अच्छे उत्पादन के साथ-साथ अच्छी आय भी प्राप्त हो रही है.

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Prabhat Khabar News Desk
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