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जिले में शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के लिए सभी को मिलकर करना होगा प्रयास

शहर के चक बलरामपुर स्थित एलिट पब्लिक स्कूल में मंगलवार को प्रभात संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

प्रभात खबर शिक्षा संवाद. शिक्षकों ने शिक्षा में सुधार के लिए दिये कई सुझाव 18 फरवरी फोटो संख्या- 03 कैप्शन- शिक्षा संवाद कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक के अलावा मेल पर तस्वीर प्रतिनिधि, पाकुड़ शहर के चक बलरामपुर स्थित एलिट पब्लिक स्कूल में मंगलवार को प्रभात संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में अलग-अलग जगहों से आए शिक्षकों ने भाग लिया. शिक्षा के क्षेत्र में सुधार को लेकर अपनी बातें खुलकर रखी. बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए कई सुझाव भी दिए. शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, फिर भी हमारा जिला शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा है. बताया कि इसका मुख्य कारण निरक्षरता, बच्चों के प्रति अभिभावकों के पास समय का ना होना आदि है. यदि इन सब चीजों में जागरुकता लाकर धीरे-धीरे सुधार की जाय तो आने वाले समय में पाकुड़ जिला भी शिक्षा की ओर में अग्रसर जिला माना जायेगा. शैक्षणिक व्यवस्था को सुधारने के लिए सर्वप्रथम युद्ध स्तर पर शिक्षा के प्रति अभिभावकों में जागरुकता पैदा करना होगा. गांव देहात के लोग अभी भी निरक्षरता के दौर से गुजर रहे हैं. उन्हें शिक्षा के महत्व की जानकारी नहीं है. आज भी उनके बच्चे सुबह होते ही रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड, गांव के गलियारों में कूड़े कचरे चुनते हुए दिखाई देते हैं. निक्षरता के कारण इस प्रकार की स्थिति पैदा हुई है. ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में जोड़ना के लिए अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों सहित जिला के पदाधिकारियों की भी सहभागिता होनी चाहिए, तभी यह संभव होगा. वहीं दूसरा प्रमुख कारण बच्चों के लिए अभिभावकों के पास पर्याप्त समय होनी चाहिए जो कि आज के दौर में अभिभावक नहीं दे रहे हैं. बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के पहले अभिभावकों को मुख्य धारा में लाना उचित होगा. यदि अभिभावक मुख्य धारा में जुड़ने लगेंगे तो उनके बच्चे मुख्य धारा में स्वयं आने लगेंगे. अभिभावक के मुख्य धारा में जुड़ने से उनके बच्चे अनुशासित होंगे और निश्चय ही पाकुड़ जिला शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा. क्या कहते हैं शिक्षक शिक्षा में ईमानदारी बरती जाए तो निश्चय ही हमारा जिला शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा. इसमें सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों की भी सहभागिता होनी चाहिए. – अभिजीत राय, प्राचार्य बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त कराने में अभिभावकों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है. इसके लिए अभिभावकों को समय निकालकर बच्चों पर ध्यान देना चाहिए. -प्रदीप वर्मा, शिक्षक निजी संस्थान के हों या सरकारी शिक्षक पर बच्चों के जीवन में दायित्व के रूप में हो तो हर तरह की शिक्षा संभव है. शैक्षणिक माहौल अपने आप तैयार हो जायेगा. – रोशन कुमार, शिक्षक वर्तमान समय में स्कूली शिक्षा में चुनौतियां बढ़ी हैं. स्कूल खुल रहे हैं. ईमानदारीपूर्वक मौजूदा संसाधनों में ही शिक्षकों को शिक्षा देनी चाहिए, तभी बच्चे आगे बढ़ पायेंगे. – कुमारी स्नेह लता, अध्यापिका कोरोना के समय से ही शिक्षा के स्तर में काफी गिरावट आयी है. इसका मुख्य कारण डिजिटल की दुनिया है. बच्चे अनुशासित कम हो रहे हैं इस पर रोक लगनी चाहिए. -अजय कुमार, शिक्षक बच्चे बेहतर भविष्य बना सकें इसके लिए प्राथमिक स्तर से ही शिक्षा को मजबूत करना होगा. यह ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा से ही प्राप्त किया जा सकता है. – इंद्रजीत मंडल, शिक्षक हमसबों के प्रयास से ही जिले में शिक्षा की अलख जगायी जा सकती है. उचित संसाधनों के बाद भी हमारा जिला शिक्षा के क्षेत्र में पीछे है. समीक्षा होनी चाहिए. – कुणाल केसरी, शिक्षक जिले में शैक्षणिक वातावरण का माहौल पैदा करना जरूरी है. इसमें समाज के लोगों की सहभागिता बहुत ही जरूरी है. समाज के लोग चाहेंगे तभी संभव हो पायेगा. -सुजीत वर्मा, शिक्षक बौद्धिक और रचनात्मक क्रियाकलाप से शिक्षा के स्तर को बढ़ावा दिया जा सकता है. शिक्षा के समक्ष जो चुनौतियां हैं उसको लेकर सभी लोगों को आगे आना होगा. -प्रतिमा पांडे, अध्यापिका नवयुवक जो शिक्षा ग्रहण कर बेरोजगारी का दंस झेल रहे हैं. युवकों को जोड़कर शिक्षा के महत्व की जानकारी देनी चाहिए. इससे शिक्षा के क्षेत्र में फायदे होंगे. – अनिल कुमार, शिक्षक सरकार की न्यू एजुकेशन पॉलिसी अच्छी है. सबों को शिक्षा मिले पहल करनी चाहिए. आज भी कुछ बच्चे कूड़ा चुनते हैं. इन बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना चाहिए. – श्वेता सिंह, शिक्षक उच्च शिक्षा को सुधारने के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई जा सकती है. छात्रों को व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण करवा कर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाया जा सकता है. – अभिजीत दास, शिक्षक

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