पुलिस पदाधिकारियों को दी गयी रिमांड व अभिरक्षा की जानकारी

Updated at : 21 Nov 2016 5:15 AM (IST)
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पुलिस पदाधिकारियों को दी गयी रिमांड व अभिरक्षा की जानकारी

पाकुड़ : सिविल कोर्ट पाकुड़ के न्याय सदन सभागार में अभियुक्त के अभिरक्षा एवं रिमांड को लेकर लीगल अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित की गयी. जिसमें जिला के सभी थाना प्रभारी, पुलिस निरीक्षक, सहायक अवर निरीक्षक, डीएसपी नवनीत हेंब्रम, एसडीपीओ संतोष कुमार, सभी रिमांड लॉयर, सभी पीएलवी को अभियुक्त के अभिरक्षा एवं रिमांड संबंधित प्रक्रिया के बारे […]

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पाकुड़ : सिविल कोर्ट पाकुड़ के न्याय सदन सभागार में अभियुक्त के अभिरक्षा एवं रिमांड को लेकर लीगल अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित की गयी. जिसमें जिला के सभी थाना प्रभारी, पुलिस निरीक्षक, सहायक अवर निरीक्षक, डीएसपी नवनीत हेंब्रम, एसडीपीओ संतोष कुमार, सभी रिमांड लॉयर, सभी पीएलवी को अभियुक्त के अभिरक्षा एवं रिमांड संबंधित प्रक्रिया के बारे में कानूनी जानकारी दी. इस अवसर पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश रंजन ने अभियुक्त के अभिरक्षा के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता में दी गयी विधि प्रावधानों के बारे में बारीकी से बताया. बताया कि अभियुक्त को कब अभिरक्षा में लिया जा सकता है

और उसे पुलिस रिमांड पर कब ले सकती है. साथ ही अभिरक्षा एवं पुलिस रिमांड के प्रकार के बारे में भी जानकारी दी. वहीं प्राधिकार के सचिव एसएस यादव ने भी उपस्थित सभी को सीआरपीसी की धारा 55, 57, 167, 81 के अतिरिक्त धारा 41, झारखंड पुलिस हस्तक अधिनियम की धारा 212 एवं 213 पर प्रकाश डालते हुए बहुत ही बारीकी से बताया. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने सभी थाना इंचार्ज और अन्वेषण पदाधिकारी को यह जानकारी के साथ-साथ सलाह दी. कहा कि जहां तक यथा संभव हो जमानतीय मामलों में अभियुक्त को थाना से ही

प्रतिभूति लेकर छोड़े. उन्होंने यह भी कि दप्रस की धारा 41 का सही से पालन न तो आयोग न ही पुलिस पदाधिकारी के द्वारा किया जाता है. आगे उन्होंने यह भी कहा कि अन्वेषण पदाधिकारी दप्रस की धारा 167 के उपखंड दो में दिये गये प्रावधान का भी सही से पालन नहीं कर पाते. अत: इन बातों को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है. संबोधन समाप्ति के पश्चात प्रश्नोत्तरी भी किया गया और सभी पदाधिकारियों ने प्रत्येक प्रश्नों का समझाते हुए जवाब दिया और दप्रस में दिये गये प्रावधानों का बारीकी से अध्ययन करने का भी परामर्श दिया. इस अवसर पर जेल अधीक्षक, जुवेनाईल बोर्ड के सदस्य, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी चंद्रभानु कुमार, अधिवक्ता सरदार धर्मेंद्र सिंह, शमीम आलम, नुकुमुद्दीन शेख, तोहिदुर आलम आदि उपस्थित थे.

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