प्रखंड में नहीं बैठते अधिकारी
Updated at : 12 May 2015 1:52 AM (IST)
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उधवा प्रखंड आज भी झेल रहा उपेक्षा का दंश उधवा : उधवा प्रखंड अपने स्थापना काल से ही उपेक्षा का दंश ङोल रहा है. 90 वर्षो बाद भी उधवा की विकास योजनाएं वैशाखी के सहारे संचालित हैं. बिहार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उधवा को प्रखंड का दर्जा दिया था. जिसके तहत […]
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उधवा प्रखंड आज भी झेल रहा उपेक्षा का दंश
उधवा : उधवा प्रखंड अपने स्थापना काल से ही उपेक्षा का दंश ङोल रहा है. 90 वर्षो बाद भी उधवा की विकास योजनाएं वैशाखी के सहारे संचालित हैं. बिहार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उधवा को प्रखंड का दर्जा दिया था. जिसके तहत 20.10.1995 को उधवा को प्रखंड बनाया गया.
लेकिन प्रखंड की एक लाख 78 हजार सात सौ की आबादी को आज तक अपना आशियाना भी नसीब नहीं हो पाया है. महज इतना ही नहीं अधिकांश सरकारी कार्यालय राजमहल प्रखंड से संचालित हैं. जिस कारण आम जनता को घोर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. राजमहल प्रखंड से संचालित होने के कारण पदाधिकारी व कर्मचारी सप्ताह में दो या तीन रोज ही प्रखंड मुख्यालय में दिखते हैं.
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