चार साल में 405 किसानों को मिले सोलर पंप, दो साल से भटक रहे हेमंत

पाकुड़ जिले में पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप से सिंचाई में सुविधा मिली है। 2025 में 211 किसानों को इसका लाभ मिला, जिनमें महेशपुर के 160 किसान सबसे अधिक हैं। इससे डीजल खर्च कम hua और खेती की लागत भी घट गई। मगर 2024 में किसी भी किसान को लाभ नहीं मिला, जिससे योजना प्रवाह में असमानता दिखती है। कई किसान जैसे हेमंत चार दो साल से आवेदन के बावजूद लाभ के इंतजार में हैं और उन्हें समुचित जानकारी नहीं मिल पाई है। कई गांवों में योजना की जागरूकता कम है। किसान बेहतर मार्गदर्शन और जागरूकता अभियान की मांग कर रहे हैं ताकि अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें। योजना से किसानों की सिंचाई संभलती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
पाकुड़ जिले में कहीं सिंचाई बनी आसान, कहीं योजना के इंतजार में किसान
2025 में 211 किसान हुए लाभान्वित, महेशपुर में सर्वाधिक 1602024 में एक भी किसानों को नहीं मिला योजना का लाभ
सानू दत्ता, पाकुड़महेशपुर प्रखंड के पलसा गांव में सोलर पंप से सिंचाई आसान हुई है, जबकि हिरणपुर के हेमंत चार जैसे किसान दो वर्षों से आवेदन के बावजूद लाभ के इंतजार में हैं. पीएम कुसुम योजना की यही दो तस्वीरें जिले की जमीनी हकीकत को सामने लाती हैं. वर्ष 2025 में जिले के 211 किसानों को इस योजना का लाभ मिला है. महेशपुर प्रखंड सबसे आगे रहा, जहां 160 किसानों के खेतों में सोलर पंप स्थापित किए गए. हिरणपुर में 19, लिट्टीपाड़ा और पाकुड़ में 11-11 तथा पाकुड़िया और अमड़ापाड़ा में 5-5 किसान लाभान्वित हुए. जिन किसानों को लाभ मिला है, उनके लिए यह योजना राहत साबित हुई है. सिंचाई आसान हुई है और डीजल पर खर्च लगभग खत्म हो गया है. खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ा है. जानकारी और प्रक्रिया की कमी
जिले के कई गांवों में योजना की जानकारी सीमित है. किसानों ने बताया कि आवेदन के बाद भी लाभ नहीं मिला या प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है. आंकड़े भी असमानता दिखाते हैं. 2022 में 181 किसानों को लाभ मिला, 2023 में यह संख्या घटकर 15 रह गई और 2024 में एक भी किसान इससे नहीं जुड़ सका. 2025 में तेजी आई लेकिन सवाल कायम है कि 2024 में एक भी लाभुक क्यों नहीं चुना गया. दो साल से इंतजार में किसानकरीब दो वर्ष पहले हेमंत चार ने अपनी पत्नी के नाम से आवेदन किया था. उम्मीद थी कि सोलर पंप मिलने से सिंचाई आसान होगी और डीजल खर्च से राहत मिलेगी. लेकिन अब तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिला है. वे बताते हैं कि कई बार विभाग से संपर्क करने के बावजूद स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई. दो साल हो गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उनका कहना है कि अगर समय पर लाभ मिलता तो खेती बेहतर हो सकती थी.
बोले किसान
सोलर पंप लगने के बाद डीजल पर निर्भरता खत्म हो गई है. सिंचाई की लागत काफी कम हो गई है, जिससे अब खेती करना आसान हो गया है.-चंदन रविदास, महेशपुर
पहले सिंचाई में परेशानी होती थी, लेकिन अब सोलर सिस्टम से खेतों में आसानी से पानी मिल रहा है. समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है.-सहाबुद्दीन शेख, महेशपुर
हमें इस योजना की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है. सही मार्गदर्शन मिले, तो हम भी इसका लाभ उठा सकते हैं.-मोहनलाल भगत, हिरणपुर
मुझे इस योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसलिए अब तक इसका लाभ नहीं उठा पाया हूं. लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचनी चाहिए.-मो. मैनुद्दीन मियां, पाकुड़िया
अगर यह सब्सिडी वाली योजना है, तो किसानों के लिए फायदेमंद होगी. जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है.— मो. बिलाल मियां, पाकुड़िया
क्या है पीएम कुसुम योजनापीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराया जाता है, जिससे सिंचाई के लिए डीजल और बिजली पर निर्भरता कम होती है. इसमें लगभग 60 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, जबकि शेष राशि के लिए लोन की सुविधा भी मिलती है.
आवेदन कैसे करें
किसान आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, जमीन के कागजात और बैंक विवरण जरूरी होते हैं. आवेदन के बाद विभागीय सत्यापन के आधार पर पात्र किसानों को सोलर पंप आवंटित किया जाता है.
साल दर साल
स्थिति
साल लाभान्वित किसान
2022 1812023 15
2024 02025 211
कुल 407(नोट: ये डाटा पीएम किसान योजना के अधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त है)
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