अधूरा पड़ा एनएच 143ए का चौड़ीकरण, गड्ढों में तब्दील सड़क से गुजरने को मजबूर लोग

अधूरा पड़ा एनएच 143ए का चौड़ीकरण, गड्ढों में तब्दील सड़क से गुजरने को मजबूर लोग
लोहरदगा़ लोहरदगा जिले में विकास योजनाओं की गड़बड़ियां और अधूरे काम आम बात बन चुके हैं. इसकी सबसे बड़ी मिसाल है राष्ट्रीय राजमार्ग 143ए का कुडू से घाघरा तक चौड़ीकरण कार्य, जो लगभग तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है. स्थिति यह है कि लोगों को जर्जर और अधूरी सड़क पर सफर करना पड़ रहा है और इसके बावजूद उन्हें टोल टैक्स भी देना पड़ रहा है. लोग इसे सरासर अन्याय मान रहे हैं. यह राष्ट्रीय राजमार्ग रांची से मुंबई को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, लेकिन इसकी हालत किसी ग्रामीण कच्ची सड़क से बदतर है. जगह-जगह अधूरा निर्माण, गड्ढों से भरी सड़क कुड़ू में इंदिरा गांधी चौक से मस्जिद के पास सड़क का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है. वहां बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं और बरसात में जलजमाव व कीचड़ से लोगों की परेशानी और बढ़ गयी है. इसी तरह हीरही के पास भी सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है. यहां सड़क का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं किया गया, जिससे उबड़-खाबड़ रास्ते पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. सेन्हा प्रखंड के जोगना के पास भी यही स्थिति है. बनी सड़क भी उखड़ गयी सबसे आश्चर्य की बात यह है कि शहरी क्षेत्र के बरवाटोली में हाल ही में सड़क निर्माण का कार्य हुआ था, लेकिन कार्य पूरा होने के तुरंत बाद ही सड़क उखड़ने लगी और अब पूरी सड़क गड्ढों में बदल चुकी है. यह गड्ढे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. पावरगंज के पास भी सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि वहां से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है. संवेदक चैन की बंसी बजा रहा, जनता परेशान इस मार्ग से प्रशासनिक अधिकारी समेत हजारों छोटे-बड़े वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं, फिर भी संवेदक को काम पूरा करने का निर्देश नहीं दिया जा रहा है. संवेदक राशि उठाकर चैन की बंसी बजा रहा है जबकि आम जनता इस अधूरे काम के कारण परेशान है. नाली निर्माण में भी गड़बड़ी नाली निर्माण में भी लापरवाही सामने आयी है. सड़क का पानी नालियों में जाने के बजाय सड़कों पर ही जमा हो रहा है. जिन स्थानों पर सड़क बनी भी है, वहां प्रिमिक्सिंग नहीं की गयी. इससे सड़क कुछ ही दिनों में टूटकर गड्ढों में तब्दील हो गयी. सांसद ने दिया था निर्देश, नतीजा शून्य सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सांसद सुखदेव भगत ने इस मामले को गंभीरता से उठाया था. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य पूरा किया जाये और टूटी-फूटी सड़कों की मरम्मत करायी जाये. लेकिन बैठक खत्म होते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया और आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क जनता की सुविधा और विकास के लिए बनायी जाती है, लेकिन लोहरदगा में यह सड़क जनता के लिए सबसे बड़ी परेशानी और खतरे का कारण बन चुकी है. ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि तत्काल अधूरे कार्यों को पूरा किया जाये ताकि लोगों को राहत मिल सके.
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