शराब छोड़ शिक्षा अपनाये आदिवासी समाज, तभी होगा सर्वांगीण विकास : मनोज उरांव

Published by : SHAILESH AMBASHTHA Updated At : 06 Mar 2026 8:53 PM

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शराब छोड़ शिक्षा अपनाये आदिवासी समाज, तभी होगा सर्वांगीण विकास : मनोज उरांव

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किस्को़ प्रखंड के हिसरी गांव में आदिवासी सरहुल पूजा समिति द्वारा प्रकृति पर्व सरहुल हर्षोल्लास से मनाया गया. इस अवसर पर स्थानीय सरना स्थल पर बैगा, पुजार और पहान ने विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की. पूजा के पश्चात पूर्व उपमुखिया मनोज उरांव के नेतृत्व में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, जिसमें पारंपरिक परिधानों में सजे सैकड़ों लोग मांदर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते नजर आये. फूल और प्रसाद का हुआ वितरण : शोभायात्रा हिसरी अखड़ा से शुरू होकर मुख्य पथ होते हुए पुनः सरना स्थल पहुंची, जो बाद में एक जनसभा में तब्दील हो गयी. यहां पारंपरिक तरीके से मां सरना, सूर्य पिता और धरती मां की आराधना की गयी. मान्यता के अनुसार, सरहुल के दिन धरती की खुदाई नहीं की जाती है. पूजा के दौरान अच्छी फसल, पर्याप्त वर्षा और क्षेत्र को दुर्घटनाओं से मुक्त रखने की प्रार्थना की गयी. अंत में श्रद्धालुओं के बीच सखुआ के फूल और चना का प्रसाद वितरित किया गया. नशा नहीं, शिक्षा से बदलेगी समाज की तस्वीर : सभा को संबोधित करते हुए मनोज उरांव ने समाज की कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा, आदिवासी समाज के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण शिक्षा की कमी है. अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजें, तभी हमारी परंपराओं का लोहा पूरी दुनिया मानेगी. शराब का सेवन समाज को खोखला कर रहा है. यदि इसे संस्कृति के अनुरूप केवल प्रसाद तक सीमित रखा जाये, तो समाज को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने कहा कि पेड़ हैं तो हमारा जीवन है. सरहुल हमें न केवल प्रकृति की रक्षा, बल्कि गरीबों की सेवा करने का भी संदेश देता है. सांस्कृतिक छटा और सुरक्षा के इंतजाम : शोभायात्रा में विभिन्न गांवों के खोड़हा दलों ने अपनी कला और संस्कृति की अनूठी झलक पेश की. छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में भारी उत्साह देखा गया. कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एएसआइ कैलाश रजक दल-बल के साथ मुस्तैद रहे. उपस्थित लोग : इस मौके पर सोमरा उरांव, गोपाल उरांव, शिवशंकर टाना भगत, प्रतिमा उरांव, अभिषेक उरांव, अर्जुन उरांव, बिरिया उरांव, दिलीप, रूपा, लालदेव, बलदेव, सुखराम, भोला, रनथु, निरंजन, ललकु, आजाद, जीवन, रामप्रवेश, बिसराम, संजय, जले, अनिल, मुकेश, बलि, सालिक राम सहित काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

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