पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था ने समाज को गुमराह करने का लगाया आरोप

Updated at :12 May 2026 9:45 PM
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पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था ने समाज को गुमराह करने का लगाया आरोप

पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था ने समाज को गुमराह करने का लगाया आरोप

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कुड़ू. पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था ने जिला राजी पड़हा प्रार्थना सभा समिति लोहरदगा के पदाधिकारियों पर आदिवासी समाज को साजिश के तहत गुमराह करने का आरोप लगाया है. पड़हा राजा बेल विजय उरांव, संयोजक बिनोद भगत, दीवान संजू भगत और उप दीवान जतरू उरांव ने कहा कि जिला राजी पड़हा समिति के पदाधिकारी ग्रामीणों को आदिवासी के बजाय खुद को रूढ़िजन विधि और मूलवासी बताने के लिए उकसा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वजों के समय से ही समाज की पहचान आदिवासी के रूप में है और इस पहचान के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जायेगी. पड़हा व्यवस्था ने राजी पड़हा समिति के अध्यक्ष सोमदेव उरांव, सचिव सुकेंदर उरांव, कोषाध्यक्ष मंगलदास उरांव सहित जलेश्वर उरांव, बिरसा उरांव और सोमे उरांव के सामाजिक बहिष्कार की मांग की है. आरोप है कि ये लोग खुद को आदिवासी कहने से कतरा रहे हैं, जिससे समाज की मूल भावना को आघात पहुंचा है. पड़हा राजा ने पूर्व पंचायती राज निदेशक निशा उरांव पर भी समाज को गलत राह दिखाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि निशा उरांव खुद गैर-आदिवासी से विवाह करने के बावजूद समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं. इसे पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था सहन नहीं करेगा.

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SHAILESH AMBASHTHA

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