आम ला रहा है जीवन में मिठास, आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं किसान

आम ला रहा है जीवन में मिठास, आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं किसान
लोहरदगा़ कभी केवल धान और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले लोहरदगा जिले के किसान अब आम की बागवानी से अपनी किस्मत बदल रहे हैं. जिले के भंडरा, किस्को, कुड़ू और सेन्हा प्रखंडों में बड़े पैमाने पर आम की खेती हो रही है, जो न केवल किसानों के जीवन में मिठास घोल रही है, बल्कि आर्थिक समृद्धि का नया मार्ग भी प्रशस्त कर रही है. बिरसा हरित ग्राम योजना का दिख रहा असर : सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत जिले में लगाये गये आम के बाग अब पूरी तरह फल देने लगे हैं. किसान अपनी बंजर जमीन को बगीचों में तब्दील कर चुके है़ं यहां मुख्य रूप से मालदा, लंगड़ा, दशहरी और आम्रपाली जैसी उन्नत किस्मों की खेती हो रही है. किसानों का कहना है कि धान की तुलना में आम की खेती अधिक लाभप्रद है. इससे होने वाली आय से अब बच्चों की पढ़ाई और घर निर्माण जैसे कार्य आसानी से पूरे हो रहे हैं. रोजगार का बना बड़ा माध्यम : आम की खेती केवल मालिकों के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी रोजगार का जरिया बनी है. बगीचों की देखरेख, फलों की तुड़ाई और पैकिंग में महिलाओं सहित स्थानीय युवाओं को काम मिल रहा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लोहरदगा की मिट्टी और जलवायु आम के लिए बेहद अनुकूल है. यदि सिंचाई और बेहतर बाजार मिले, तो यह क्षेत्र बड़ा उत्पादन केंद्र बन सकता है . बाजार में आम की धूम और कीमतें : लोहरदगा के आम की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बाहरी जिलों में भी काफी है. कई बाहरी व्यापारी सीधे बागानों से खरीदारी कर रहे हैं. वर्तमान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क किनारे आम की खूब बिक्री हो रही है. बाजार भाव : दशहरी : 100 रुपये, मालदा : 80 रुपये, आम्रपाली : 70 रुपये, लंगड़ा / बैगन फली / हिंद सागर : 60 रुपये, लोकल देशी आम : 40 रुपये प्रति किलो है़
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