सबसे अधिक परेशानी वनांचल क्षेत्रों के लोगों को हो रही है. पर्याप्त गर्म कपड़े न होने के कारण वे रातें आग तापकर गुजारते हैं. ग्रामीण इलाकों में अब कुछ गर्म कपड़े उपलब्ध हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड के लिए वे पर्याप्त नहीं हैं. इन लोगों को अपने पालतू मवेशियों को बचाने की चिंता भी सताती है. नदी-नालों और जंगलों से बहती ठंडी हवाएं उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती हैं.
रोज कमाने-खाने वाले तबके पर ठंड का असर सबसे ज्यादा है. वाहनों में काम करने वाले ड्राइवर, खलासी और मजदूरों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. ठेला-खोमचा चलाने वाले लोग भी परेशान हैं, क्योंकि सूरज ढलते ही राहगीरों की संख्या घट जाती है और बिक्री कम हो जाती है. इससे उनके परिवार चलाने में दिक्कतें आ रही हैं.देसी उपचार पर निर्भर नहीं रहें
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