सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक रीति-रिवाज जनजातियों की पहचान है : निशा उरांव

सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक रीति-रिवाज जनजातियों की पहचान है : निशा उरांव
लोहरदगा़ सदर प्रखंड अंतर्गत ग्राम कुटमू स्थित आदिवासी कला सांस्कृतिक भवन में पहान, महतो, पुजार और जनजातीय बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों के लिए पेसा अधिनियम 1996 पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी. इस कार्यशाला का उद्देश्य रूढ़िजन्य आदिवासी समाज में सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ पेसा नियमावली की जानकारी और उसके क्रियान्वयन को बढ़ावा देना था. कार्यशाला की मुख्य अतिथि पूर्व झारखंड राज्य पंचायती राज विभाग निदेशक सह आयकर आयुक्त रांची निशा उरांव, खूंटी जिला मुंडा राजा सह रूढ़िजन्य जनजातीय समन्वय समिति के अध्यक्ष महादेव मुंडा और गुमला जिला की खड़िया अगुवा कलावती देवी, लोहरदगा जिला के राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के पदाधिकारी और अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे. पहान, महतो और पुजार को कार्य करने का अधिकार प्राप्त : मुख्य अतिथि निशा उरांव ने कहा कि कार्यशाला में उपस्थित सभी पहान, महतो और पुजार के लिए उच्च न्यायालय द्वारा पेसा 1996 नियामावली लागू करने का आदेश सुना चुका है. उन्होंने बताया कि रूढ़िजन्य जनजातीय आदिवासियों के सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाज पूर्वजों से चलते आ रहे हैं और ग्राम सभा, प्रकृति और सांस्कृतिक गतिविधियों में पहान, महतो और पुजार को कार्य करने का अधिकार प्राप्त है. दास्तवेजी का कार्य उरांव, मुंडा, संस्थाल, खड़िया में शुरूआत हो गया है. कार्यक्रम में जयराम उरांव, जांगी खड़िया, लातेहार से विनय चेरो, सोमदेव उरांव, सुकेश्वर उरांव, बिरसा उरांव, सुधू भगत, जलेश्वर उरांव, सोमे उरांव, नूतन कच्छप, हरीश उरांव, सुधीर उरांव, मतलू भगत, राजू उरांव, बुधराम उरांव, फुल्केश्वर उरांव, मगलदास भगत, जयंती उरांव और नीलम उरांव सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे.
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