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लोहरदगा से रिचुघुटा तक बननी है सड़क, छह वर्ष बाद भी नहीं हुआ निर्माण, बरसात में चलना हुआ मुश्किल

Updated at : 09 Feb 2022 2:06 PM (IST)
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लोहरदगा से रिचुघुटा तक बननी है सड़क, छह वर्ष बाद भी नहीं हुआ निर्माण, बरसात में चलना हुआ मुश्किल

सड़क निर्माण विभाग द्वारा 74 करोड़ रुपये की लागत से अशोक प्रधान व नागेंद्र पांडे कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा लोहरदगा से रिचुघुटा तक सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है.

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सड़क निर्माण विभाग द्वारा 74 करोड़ रुपये की लागत से अशोक प्रधान व नागेंद्र पांडे कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा लोहरदगा से रिचुघुटा तक सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है. सड़क निर्माण का कार्य वर्ष 2017-18 में शुरू किया गया, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है. लगभग छह वर्ष तक सड़क निर्माण के नाम पर लोगों को संवेदक परेशान कर रहा है. कहीं पुल निर्माण के नाम पर गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है.

तो कहीं सड़क को अधूरा छोड़ दिया गया है. जिससे लोगों को कहीं सड़क से उड़ रहे धूल कण से परेशानी हो रही है, तो कहीं जल जमाव से. किस्को मोड़ से रिचुघुटा के बीच कई स्थानों पर आधी अधूरी सड़क बनाकर छोड़ दी गयी है. मसूरियाखाड़ के पास पुल निर्माण के नाम पर लगभग एक वर्ष पहले गड्ढा खोदा गया है, जो अबतक सिर्फ गड्ढा ही बनकर रह गया है.

इस स्थान पर पुल निर्माण का कार्य पूरा नहीं हुआ है. इसके अलावा गार्डवाल भी नहीं बनाया गया है, जिसके कारण सड़क का मिट्टी पानी का बहाव से बह गया है. इस स्थान पर सड़क इतना संकीर्ण हो गया है कि लोगों को चलने में भी परेशानी हो रही है. उतार चढ़ाव वाले सड़क होने के कारण दो पहिया वाहन भी लोगों को लेकर चलने में दुर्घटना की संभावना बनी हुई है.

बरसात के दिनों में यहां चलने में खतरे से खाली नहीं है. बरसात के अलावा अन्य दिनों में इस सड़क पर वाहनों के चलने से धुल इतना उड़ता है कि सामने से गुजर रहे पैदल एवं दो पहिया वाहन चालको को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सड़क में मेटल बिछाने के बाद जैसे तैसे छोड़ दिए जाने से इस सड़क में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती है. सड़क संकीर्ण होने के कारण चार पहिया वाहन चलने की संभावना ही नहीं रह गयी है.

जबकि ग्रामीण में भी अब सुविधा के नाम पर गांव-गांव से चार पहिया वाहन चलने लगी है. बरसात के दिनों में सड़क से मिट्टी का बहाव हो जाने के बाद अब गांव तक चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाता. शादी-ब्याह के मौके पर भी लोगों को परेशानी झेलना पड़ता है. चूंकि अब गांव तक चार पहिया पाहन पहुंच ही नहीं पाता. इतने लंबे समय से सड़क निर्माण कार्य बंद होने के बावजूद सड़क निर्माण कार्य को पूरा कराने की दिशा में न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि संवेदनशील है और ना ही स्थानीय प्रशासन. इस क्षेत्र के लोग लंबे समय से परेशानी झेलने को विवश है.

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