मैया तेरे लाल का मेरे आराध्य का हमें भी दर्शन करा दो : विष्णुचित्त

मैया तेरे लाल का मेरे आराध्य का हमें भी दर्शन करा दो : विष्णुचित्त
सेन्हा़ प्रखंड मुख्यालय स्थित दुर्गा मंदिर में चल रहे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत मंगलवार को कथा वाचक विष्णुचित्त महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया. कथा का श्रवण कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गये. भोलेनाथ ने किया था बाल-कृष्ण के दर्शन के लिए हठ : कथा के दौरान महाराज जी ने द्वापर युग का स्मरण कराते हुए बताया कि भाद्रपद मास की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में जब भगवान विष्णु ने कृष्ण रूप में कारागार में अवतार लिया, तो उनके दर्शन के लिए स्वयं महादेव लालायित हो उठे. भगवान शंकर साधु का वेश धारण कर गोकुल पहुंचे और माता यशोदा से बाल-कृष्ण के दर्शन की प्रार्थना की. माता यशोदा ने राक्षसों के भय से उन्हें दर्शन देने से मना कर दिया, परंतु महादेव ने भी हठ कर लिया कि जब तक वे अपने आराध्य देव के दर्शन नहीं कर लेंगे, तब तक वे द्वार से नहीं हटेंगे. इस प्रसंग को सुनकर वहां उपस्थित भक्तगण रोमांचित हो उठे. श्रीमद्भागवत कथा सर्वश्रेष्ठ : विष्णुचित्त महाराज ने आगे कहा कि बाल्यकाल से ही भगवान श्रीकृष्ण ने अनेकों राक्षसों का संहार कर धरती को पापमुक्त किया. उन्होंने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश देकर संपूर्ण संसार को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया. उन्होंने कहा कि व्यास जी द्वारा रचित श्रीमद्भागवत गीता में भगवान का अलौकिक रूप वर्णित है, इसीलिए सभी कथाओं में श्रीमद्भागवत कथा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है. इस अवसर पर साकेत मिश्रा, रामानुज मोहन दास, कुलदीप दुबे और सूरज मिश्रा सहित सैकड़ों महिला-पुरुष व बच्चे उपस्थित थे. कथा के दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा.
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