लोहरदगा. रेलवे स्टेशन से ट्रेनों का परिचालन बंद रहने का असर अब आम जनता पर साफ दिखाई देने लगा है. रेलवे को प्रतिदिन भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है. पहले स्टेशन से रोजाना लगभग तीन हजार टिकटों की बिक्री होती थी, वहीं मालगाड़ी बंद रहने से प्रति ट्रिप करीब पच्चीस लाख रुपये का नुकसान हो रहा है. खर्च और परेशानी दोनों बढ़ गया है यात्रियों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन साबित हो रही है. दिहाड़ी मजदूर रंजीता देवी बताती हैं कि काम के सिलसिले में उन्हें रांची आना-जाना पड़ता है. ट्रेन बंद होने से बस या अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे खर्च बढ़ गया है और समय पर पहुंचना भी मुश्किल हो गया है. अधिवक्ता पारन प्रसाद अग्रवाल का कहना है कि इलाज के लिए मरीजों को बाहर ले जाना पड़ता है. ट्रेन सबसे सस्ता और सुरक्षित साधन था, लेकिन अब टेंपो से सफर करना पड़ता है, जिसका किराया एक तरफ से ही पचास रुपये है. नियमित यात्री रंजीत घोष बताते हैं कि ट्रेन लोहरदगा से नहीं चलने के कारण उन्हें ईरगांव से ट्रेन पकड़नी पड़ रही है. इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है क्योंकि समय पर माल मंगाना और बाहर जाना कठिन हो गया है. वहीं जाकिर कुरैशी, जिन्होंने एमएसटी बनवाया है, कहते हैं कि रोजाना रांची आना-जाना अब परेशानी भरा हो गया है. छात्रों को भी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के लिए रांची जाना पड़ता है, लेकिन ट्रेन बंद होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
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