आम के मंजरों से महकी बागवानी, किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद

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आम के मंजरों से महकी बागवानी, किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद

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किस्को़ किस्को और पेशरार प्रखंड क्षेत्र में इस वर्ष आम के पेड़ों पर लदे भरपूर मंजरों को देख किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. पेड़ों की स्थिति ऐसी है कि मंजरों के कारण पत्ते तक नजर नहीं आ रहे हैं. यदि प्राकृतिक आपदा नहीं हुई, तो इस वर्ष क्षेत्र में आम की रिकॉर्ड पैदावार होने की उम्मीद है. लाखों की कमाई और रोजगार का जरिया : मनरेगा और जेएसएलपीएस के माध्यम से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आम की बागवानी की गयी है. पेशरार में 220 एकड़ और किस्को में नाबार्ड की योजना के तहत 85 एकड़ में बागवानी फल-फूल रही है. किसान प्रति वर्ष बिना किसी बड़ी पूंजी के 30 से 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं. इसके साथ ही, बागवानी की देखरेख के माध्यम से करीब 150 बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है. घर बैठे हो रही है आम की बिक्री : खास बात यह है कि किसानों को आम बेचने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं होती. फल आते ही व्यापारी सीधे बागवानी पहुंचकर सौदा कर लेते हैं. वे आधा पैसा एडवांस देते हैं और बाकी फल तोड़ने के बाद. एक पौधे से औसतन 25 किलो आम निकलता है, जिससे किसान को 700 से 800 रुपये की बचत होती है. विविध किस्मों से बढ़ा रुझान : क्षेत्र में फजली, लंगड़ा, मालदा, आम्रपाली और हिमसागर जैसी उन्नत किस्मों के पौधे लगाये गये हैं. लैणा उरांव, जितबाहन उरांव और अविनाश मिंज, गोवर्धन उरांव एवं पंचायत के 30 से अधिक किसान 17 एकड़ से अधिक भूमि पर सफलता से खेती कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि बागवानी में मेहनत कम है और व्यापारी ही देखरेख की जिम्मेदारी संभाल लेते हैं, जिससे उन्हें घर बैठे आय मिल रही है.

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