अविराम स्कूल ऑफ एक्सीलेंसी टिको कुड़ू ने पेश की मानवता की मिसाल, चार बच्चों को लिया गोद

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 19 May 2026 3:03 PM

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जानकारी देते अविराम के सचिव इंद्रजीत कुमार भारती और तीनों बच्चे. फोटो: प्रभात खबर

Lohardaga News: लोहरदगा के कुड़ू स्थित अविराम स्कूल ऑफ एक्सीलेंसी ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए चार जरूरतमंद बच्चों को गोद लिया है. विद्यालय सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने बच्चों को मैट्रिक तक निशुल्क शिक्षा देने का संकल्प लिया. इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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कुड़ू से अमित कुमार राज की रिपोर्ट

Lohardaga News: लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड स्थित अविराम स्कूल ऑफ एक्सीलेंसी टिको कुड़ू ने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल पेश की है. विद्यालय प्रबंधन ने चार जरूरतमंद बच्चों को गोद लेकर उन्हें निशुल्क शिक्षा देने का संकल्प लिया है. इस पहल की पूरे इलाके में सराहना हो रही है और लोग इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं.

आर्थिक और पारिवारिक संकट से जूझ रहे बच्चे

विद्यालय के सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने आर्थिक और पारिवारिक संकट से जूझ रहे बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी उठाई है. उनका कहना है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और किसी भी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए.

पिता की मौत के बाद संकट में था परिवार

जानकारी के अनुसार चंदवा थाना क्षेत्र के लाधुप गांव निवासी छात्रा अनम काश्मी के पिता असवद राय का निधन ईद से चार दिन पहले हो गया था. पिता की अचानक मौत के बाद परिवार गहरे आर्थिक संकट में आ गया. घर की स्थिति इतनी खराब हो गई कि अनम ने पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया था. वह एक सप्ताह से विद्यालय भी नहीं आ रही थी. जब इस बात की जानकारी विद्यालय के सचिव इंद्रजीत कुमार भारती को मिली तो उन्होंने तुरंत अनम के घर पहुंचकर परिवार की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने अनम की मां से बातचीत की और बच्चों की परेशानी को करीब से समझा.

तीन भाई-बहनों की शिक्षा का जिम्मा लिया

परिवार की स्थिति देखने के बाद इंद्रजीत कुमार भारती ने बड़ा फैसला लेते हुए अनम काश्मी के साथ उनके दो भाइयों अहद अली और नौफल अली को भी गोद लेने की घोषणा की. उन्होंने तीनों बच्चों को मैट्रिक तक निशुल्क शिक्षा देने का निर्णय लिया है. विद्यालय प्रबंधन की ओर से बच्चों की पढ़ाई, स्कूल फीस और अन्य जरूरी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इस फैसले के बाद परिवार को बड़ी राहत मिली है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है और जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनती है.

कैंसर से जूझ रही छात्रा को भी मिला सहारा

विद्यालय ने सिर्फ अनम और उसके भाइयों तक ही मदद सीमित नहीं रखी. कक्षा सातवीं की छात्रा अर्चना उरांव, जो कैंसर से जूझ रही हैं और बीमारी के कारण अपना एक पैर गंवा चुकी हैं, उन्हें भी विद्यालय सचिव ने गोद लेने का निर्णय लिया है. विद्यालय अब अर्चना की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा ताकि वह विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रख सके. इस फैसले से अर्चना और उनके परिवार को बड़ा मानसिक सहारा मिला है.

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इलाके में हो रही पहल की सराहना

अविराम स्कूल ऑफ एक्सीलेंसी की इस मानवीय पहल की पूरे कुड़ू और आसपास के क्षेत्रों में जमकर सराहना हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में जब लोग अपने तक सीमित होते जा रहे हैं, ऐसे में बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए आगे आना सच्ची इंसानियत की पहचान है. लोगों का मानना है कि यह कदम केवल चार बच्चों की जिंदगी बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज को भी यह संदेश देगा कि कठिन परिस्थितियों में जरूरतमंदों का साथ देना ही सबसे बड़ा मानव धर्म है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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