लोहरदगा : उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में दीर्घकालिक विकास के लिए जल प्रबंधन तथा राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता जागरूकता सप्ताह विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ.
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त, जिप अध्यक्ष जयवंती भगत, जिप उपाध्यक्ष मनीर उरांव ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्जवलित कर किया. डीसी ने कहा कि हर मनुष्य के शरीर का 2/3 भाग जल है और दुनिया में जिस तरह साफ पानी के स्नेत कम हो रहे हैं, आने वाले समय में जल के लिए संघर्ष और टकराव भी होंगे. आज हम सभी के समक्ष यह एक बड़ी चुनौती है कि हम जल को स्वच्छ व गुणवत्ता को बरकरार रख सकें. यह आवश्यक है कि हम जल की आवश्यकताओं का आकलन करते हुए एक सम्यक और वृहद योजना बनायें जो जल के उपलब्ध स्नेतों का समझदारी पूर्वक उपयोग के साथ ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर भी केंद्रित हो.
उन्होंने लोगों, जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न सामाजिक और स्वैच्छिक संगठनों से इस अभियान में जुड़ने और इसे सफल बनाने की भी अपील की.
कार्यशाला में कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता विपिन बिहारी सिन्हा ने जल प्रबंधन की आवश्यकता और इसके महत्व पर विशेष चर्चा की. कहा कि 16 से 22 मार्च तक प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. अभियान में 16 मार्च को जिला मुख्यालय से स्वच्छता रथ रवाना किया जायेगा. 17 एवं 18 मार्च को प्रखंड स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जायेगी. जागरूकता रैली सभी प्रख्ांडों में सभी विद्यालयों में की जायेगी. पाइप के माध्यम से हर घर को स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की स्वच्छ ग्राम योजना के लिये कुडू के चुल्हापानी एवं सेन्हा प्रखंड के भड़गांव का चयन के लिए प्रस्ताव भी दिया गया है.
बीडीओ विजय नाथ मिश्र ने कहा कि पानी जीवन की मूलभूत आवश्यकता है और सभी प्रखंडों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करने के लिये प्रखंड स्तर से हर सहयोग किया जायेगा. जिप उपाध्यक्ष मनीर उरांव ने सरकारी प्रयासों के साथ जन भागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्ंिटग तकनीक को अनिवार्य रुप से अपनाया जाना चाहिए. साथ ही मौजूद जल स्नेतों के रख-रखाव के लिए पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए. सभी को अपने हिस्से की जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करना चाहिए.
जिप अध्यक्ष जयवंती भगत ने कहा कि लोगों को जल की बरबादी रोकने के लिए जागरूक किये जाने की जरूरत है. घरों में सॉक पिट और गांव में चेकडैम बना कर हम प्रकृति से लिये जल का कुछ हिस्सा उसे लौटा सकते हैं.
