कोषागार से बिल पास नहीं होने से संवेदक परेशान

लोहरदगा : लोहरदगा जिला की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी है. पिछले लगभग दो माह से कोषागार से विपत्र पारित नहीं हो रहा है जिसके कारण संवेदक परेशान है़ं चुनाव के समय से ही बाजार की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरायी हुई है़ निर्माण कार्य करने के बाद विपत्र कोषागार भेजा गया लेकिन वहां विपत्र पारित […]
लोहरदगा : लोहरदगा जिला की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी है. पिछले लगभग दो माह से कोषागार से विपत्र पारित नहीं हो रहा है जिसके कारण संवेदक परेशान है़ं चुनाव के समय से ही बाजार की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरायी हुई है़ निर्माण कार्य करने के बाद विपत्र कोषागार भेजा गया लेकिन वहां विपत्र पारित नहीं हो रहा है.
चुनाव परिणाम की घोषणा होने के बाद सरकार की एक चिट्ठी आयी और उस चिट्ठी के बाद तमाम विपत्रों के पारित करने पर रोक लगा दी गयी है़ लाखों-करोड़ों रुपये का निर्माण कार्य करने के बाद संवेदक अब पैसे के लिए परेशान है़ं बताया जा रहा है कि लोहरदगा कोषागार में 300 से ज्यादा विपत्र लंबित पड़े है़ं उन्हें पारित करने के बाद भी चेक निर्गत नहीं हो रहा है़ एक अनुमान के मुताबिक लगभग 10 करोड़ रुपया लोगों का कोषागार में फंसा हुआ है.
यह स्थिति सिर्फ लोहरदगा में ही नहीं वरन पूरे राज्य में है़ संवेदक प्रेम कुमार सिन्हा का कहना है कि निर्माण कार्य करने के बाद अब पैसे के लिए कोषागार जाने पर मालूम हो रहा है कि सरकार की चिट्ठी के कारण विपत्र रोक दिया गया है़ संवेदक मुजीबउर रहमान बबलू का कहना है कि रात-दिन एक कर किसी तरह निर्माण कार्य पूरा किये लेकिन अब पता चल रहा है कि सरकार द्वारा भुगतान पर रोक लगा दी गयी है.
संवेदक दुखहरण साहू का कहना है कि इधर-उधर से पैसे की व्यवस्था कर निर्माण कार्य कराया और अब बिल ट्रेजरी में रुका हुआ है़ बताया जा रहा है कि ट्रेजरी का सर्वर डाउन कर दिया गया है़ जिसके कारण आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है़ संवेदक मेहंदी हसन का कहना है कि आखिर हम लोग काम कैसे करेंगे?
दुकानों से उधार लेकर निर्माण कार्य किये हैं दुकानों में बताया गया था कि विपत्र पास होते ही पैसा चुकता कर देंगे लेकिन विपत्र ट्रेजरी में फंसा हुआ है़ ट्रेजरी का सर्वर डाउन हो चुका है और इस संबंध में अब तक कोई भी व्यक्ति स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बता पा रहा है कि बिल कब पारित होगा, पैसा कब मिलेगा, निर्माण कार्य करने के बाद अब खुद को ठगा महसूस कर रहे है़.
इस संबंध में लोहरदगा जिला के अन्य संवेदक भी अपनी व्यथा कथा बताते हुए कहा कि पिछले दो महीने से लोग परेशान हैं और निकट भविष्य में इस समस्या का निदान कैसे होगा? यह किसी को समझ में नहीं आ रहा है इस संबंध में अधिकारी कुछ भी बताने से परहेज कर रहे है़ं
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