मनरेगा से डोभा निर्माण में भारी गड़बड़ी

Updated at : 12 Apr 2018 1:56 AM (IST)
विज्ञापन
मनरेगा से डोभा निर्माण में भारी गड़बड़ी

कुड़ू (लोहरदगा) : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट के तहत प्रखंड के 14 पंचायतों में बने डोभा का हाल बेहाल है. एक साल पहले बने आधे से ज्यादा डोभा सूख गया गया, तो कहीं का मिट्टी भर गया है. कही डोभा की खुदाई किये बगैर डोभा निर्माण के लिए आवंटित राशि की निकासी […]

विज्ञापन

कुड़ू (लोहरदगा) : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट के तहत प्रखंड के 14 पंचायतों में बने डोभा का हाल बेहाल है. एक साल पहले बने आधे से ज्यादा डोभा सूख गया गया, तो कहीं का मिट्टी भर गया है. कही डोभा की खुदाई किये बगैर डोभा निर्माण के लिए आवंटित राशि की निकासी कर ली गयी है.

सबसे बड़ी बात यह है कि डोभा निर्माण के बाद कोई अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए बांस से घेराबंदी करने के लिए प्रत्येक डोभा मे पांच सौ रू आंवटित किया गया था . मनरेगा के साईट पर डाटा इंट्री करते हुए सरकारी राशि की निकासी कर ली गयी, लेकिन कहीं भी खुदाई किये गये डोभा की बांस से घेराबंदी नहीं की गयी है. कई लाभुकों को पता भी नहीं है कि डोभा घेराबंदी के नाम पर पांच सौ रुपया आवंटित किया गया था. इस राशि की निकासी कर ली गयी है. बताया जाता है कि प्रखंड के 14 पंचायतों में चालू वित्तीय वर्ष 2017-2018 में लगभग सात सौ पचास डोभा निर्माण योजना को प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. डोभा निर्माण के लिए तीन साईज में कहीं चालीस हजार से लेकर 60 हजार आवंटित किया गया था. डोभा निर्माण के पीछे राज्य सरकार की मंशा साफ थी कि भूमिगत जलस्तर, जो काफी नीचे चला गया है उसे बढ़ाया जाये. बरकरार रखा जाये, साथ ही मजदूरों को रोजगार मुहैया कराते हुए मजदूरों का पलायन रोका जाये, लेकिन सरकार की मंशा पर पानी फेरते हुए मनरेगा के तहत कार्यरत कर्मियो ने जैसे-तैसे डोभा तो बना दिया. कहीं डोभा मानक के अनुसार नहीं बनाया गया. नतीजा कई स्थानों पर डोभा का अस्तित्व मिटता जा रहा है कही मिट्टी भर गया है. कहीं-कहीं डोभा में थोड़ा बहुत पानी बचा है. डोभा में डूबने से लगातार हो रहे हादसे के बाद सरकार ने मनरेगा से बननेवाले डोभा की घेराबंदी हेतु प्रति डोभा पांच – पांच सौ रुपया आवंटित किया गया था. इस पांच सौ रु से पांच बांस का बंबू लेकर चारों तरफ से घेराबंदी कर दिया जाये. ताकि किसी की मौत डोभा में डूबने से नहीं हो. मनरेगा डाटा इंट्री के साइट पर डोभा निर्माण के बाद घेराबंदी के लिए आवंटित प्रति डोभा पांच-पांच सौ रू की निकासी संबंधित पंचायत के कर्मियों द्वारा कर ली गयी. जमीनी हकीकत यह है कि मनरेगा से बने डोभा में कहीं भी, किसी भी डोभा में बांस की घेराबंदी नहीं की गयी है, ना ही लाभुक को बांस का बंबू ही खरीद कर दिया गया है. कई लाभुकों ने बताया कि हमलोगों को जानकारी भी नहीं है कि डोभा निर्माण के बाद घेराबंदी के लिए बांस का बंबू दिया गया था. बताया जाता है कि बंबू खरीद कर आपूर्ति करने के नाम पर राशि की निकासी की गयी है. इस संबंध में मनरेगा बीपीओ अरबिंद रौशन ने बताया कि डोभा में घेराबंदी के लिए बांस खरीदने तथा घेराबंदी के लिए लाभुक को पैसा दिया गया था. लाभुकों ने घेराबंदी नहीं की, तो लाभुक की जिम्मेवारी बनती है . प्रखंड प्रशासन का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola