धरती पर यीशु के आते ही बजने लगी घंटियां
Updated at : 26 Dec 2017 8:52 AM (IST)
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लोहरदगा : जिले में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया. 24 दिसंबर की रात में ही मसीही विश्वासी विभिन्न चर्चो में जमा होने लगे थे. गिरजाघरों को आकर्षक तरीके से सजाया गया था. देर रात जैसे ही प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ चर्च की घंटिया बजने लगी और आतिशबाजी शुरू हो गयी. रंग-बिरंगी […]
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लोहरदगा : जिले में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया. 24 दिसंबर की रात में ही मसीही विश्वासी विभिन्न चर्चो में जमा होने लगे थे. गिरजाघरों को आकर्षक तरीके से सजाया गया था. देर रात जैसे ही प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ चर्च की घंटिया बजने लगी और आतिशबाजी शुरू हो गयी. रंग-बिरंगी रौशनी से सजाये गये चर्च में विशेष प्रार्थना का दौर शुरू हो गया. यीशु के बाल रूप का चुंबन किया गया. नाच-गान के साथ प्रभु यीशु का जन्मोत्सव मनाया गया.
जिले के लुथरन मिशन चर्च, पतराटोली चर्च तथा उर्सुलाईन चर्च को आकर्षक तरीके से सजाया गया था. पतराटोली चर्च में रात्रि 10.30 बजे से फादर प्रफुल्ल लकड़ा, फादर राजेंद्र खाखा, फादर तेज लिंडा, डिकन तोबियस ने मिस्सा अनुष्ठान कराया. कार्यक्रम की शुरुआत युवा संघ द्वारा भजन के साथ किया गया. चर्च को संत अन्ना की धर्मबहनों ने आकर्षक तरीके से सजाया था.
मौके पर फादर प्रफुल्ल लकड़ा ने कहा कि अपने दिल रूपी चरनी में प्रभु यीशु को जगह दें. अपने दिल को तैयार रखें यीशु मसीह के लिए. उन्होंने कहा कि क्रिसमस का त्योहार मेल-मिलाप का त्योहार है. सभी को प्यार करें. यीशु का अनुशरण करते हुए जीवन जीयें. उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु दीन-दुखियों की सेवा के लिए धरती पर आये थे.
मौके पर राजू बेरनार्ड कुजूर, फ्रेडी कुजूर, फिलिप तिग्गा, शैलेश टुटी, जेवियर लकड़ा, अनसेल भेंगरा, नरेंद्र मिंज, अशोक तिर्की, सुभाष लकड़ा, ज्ञान कुजूर, नवनीत, अगुस्टीन टोपनो, प्रदीप खेस, समीर मिंज, अनुप कुजूर, सुषमा बेक, रश्मि कुजूर, नीलम तिर्की, सिस्टर पौलिना, सिस्टकर अलका, सिस्टर मटेल्डा सहित विभिन्न ग्रामीण इलाकों से भी काफी संख्या में ख्रीस्त धर्मावलंबी चर्च पहुंचे थे.
मिशन चौक स्थित एनडबल्यूजीइएल चर्च में विशेष क्रिसमस अराधना का आयोजन किया गया. अराधना का संचालन पादरी जोहन भेंगरा, उपनिदेशक पादरी डॉ झकमक नीरज एक्का द्वारा किया गया. क्रिसमस की महत्ता को बतलाते हुए उन्होंने कहा कि यीशु मसीह का जन्म पूरे मानव जाति के उद्धारकर्त्ता के रूप में हुआ. दो हजार वर्ष पूर्व प्रभु यीशु का जन्म हुआ और आज भी उनका जन्मदिन मनाते हैं.
उन्होंने कहा कि चरनी की सच्चाई को समझना होगा. ईश्वर ने मानव की मुक्ति व उद्धार के लिए अपने प्रिय पुत्र बालक यीशु को धरती पर भेजा. बालक यीशु ने धरती पर अवतरित होते ही बुराई के खिलाफ आवाज उठाया. यीशु खुद कष्ट सहे. मानव जाति को सही राह दी. आज हम सभी प्रभु यीशु के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करें और उनके बताये मार्ग पर चलें.
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