प्रखंड का दरजा मिले नौ साल हो गये, स्वास्थ्य उपकेंद्रों के भरोसे हैं लोग, आज तक नहीं बना स्वास्थ्य केंद्र
Updated at : 04 Aug 2017 12:58 PM (IST)
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लोहरदगा: कैरो प्रखंड को प्रखंड का दर्जा मिले नौ साल हो चुका, बावजूद इसके कैरो प्रखंड क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा सहित अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हुई है. प्रखंड क्षेत्र के लोग चिकित्सा के नाम पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों या झोलाछाप डाक्टरों के भरोसे हैं. स्वास्थ्य उपकेंद्र में भी स्वीकृत पद के अनुरूप न […]
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लोहरदगा: कैरो प्रखंड को प्रखंड का दर्जा मिले नौ साल हो चुका, बावजूद इसके कैरो प्रखंड क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा सहित अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हुई है. प्रखंड क्षेत्र के लोग चिकित्सा के नाम पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों या झोलाछाप डाक्टरों के भरोसे हैं. स्वास्थ्य उपकेंद्र में भी स्वीकृत पद के अनुरूप न तो डॉक्टर पदस्थापित हैं और न ही अन्य कर्मी. जिसके कारण स्वास्थ्य उपकेंद्र का संचालन भी सही तरीके से नहीं हो पाता. जिसका खामियाजा प्रखंड क्षेत्र के आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.
एक करोड़ 11 लाख की लागत से शुरू िकया गया था िनर्माण
कैरो प्रखंड गठन के बाद कैरो प्रखंड मुख्यालय में अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य 1 करोड़ 11 लाख रुपये की लागत से शुरू किया गया था, जिसका निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है. ग्रामीणों की मांग पर तत्कालीन सिविल सर्जन एमएम सेनगुप्ता द्वारा अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य पूरा करा कर स्वास्थ्य सुविधा बहाल करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उनके तबादले के बाद योजना धरी की धरी रह गयी. लोगों को अब तक स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सिर्फ स्वास्थ्य केंद्र मिला है. सरकारी योजना पर बंदरबांट के बाद भी योजना अधूरी रह गयी है. अब तो अधूरे बिल्डिंग से भी खिड़की दरवाजे गायब होने लगे हैं. भवन भी जर्जर अवस्था में पहुंच गया है.
संचालन आज भी पुराने कार्यालयों से
प्रखंड गठन के बाद भी स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास परियोजना कार्यालय सहित अन्य विभागों का संचालन आज भी पुराने कार्यालयों से होता है. नगजुआ स्वास्थ्य केंद्र का संचालन पुराने प्रखंड भंडरा से तो हनहट स्वास्थ्य केंद्र का संचालन कुडू प्रखंड से होता है. जिसके कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है.
न जन प्रतिनिधि, न अधिकारी ही सक्रिय हैं
ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसके लिए न तो यहां के जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासनिक अधिकारी ही सक्रिय हैं जिसके कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए परेशानी झेलना पड़ता है. सढ़ाबे गांव निवासी किशोर उरांव का कहना है कि कैरो प्रखंड का गठन जब हो गया, तो यहां भी अन्य प्रखंडों की तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए ताकि लोगों को बेहतर इलाज मिल सके. प्रमोद साहू का कहना है कि अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो जाता, तो लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए भटकना नही पड़ता. यहां डाक्टर एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी रहते तो नि:संदेह हमलोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता. सिकंदर अंसारी का कहना है कि यदि जल्द प्रखंड क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं कराया गया तो लोग आंदोलन को विवश होंगे. खलिल अंसारी का कहना है कि कैरो क्षेत्र गरीब क्षेत्र है. यहां के लोगों का आमदनी का स्रोत नहीं है. ऐसे में छोटी-छोटी बीमारियों के लिए लोहरदगा एवं रांची जाना परेशानी का कारण बन जाता है. नौशाद अंसारी का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधा लोगों को नहीं मिलने का मुख्य कारण प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों की उदासीनता है.
एक डॉक्टर व एक एएनएम हैं कार्यरत
कैरो स्वास्थ्य उपकेंद्र में डॉक्टर का स्वीकृत पद दो है, जिसमें एक डाक्टर कार्यरत हैं. तीन एएनएम के स्थान पर एक एएनएम कार्यरत है. स्वास्थ्य केंद्र संचालन के लिए आउटसोर्सिंग के तहत दो एएनएम एवं एक सुरक्षाकर्मी की बहाली की गयी है जबकि कैरो स्वास्थ्य उपकेंद्र के अंतर्गत पड़ने वाली विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में टीकाकरण काम किया जाता है. पदस्थापित डॉ राकेश कुमार द्वारा व्यवस्था बनाकर टीकाकरण एवं स्वास्थ्य उपकेंद्र का संचालन सही तरीके से किया जा रहा है लेकिन यह अपर्याप्त है. स्वास्थ्य केंद्र में लैब टेक्नीशियन नहीं है जिसके कारण मरीजों का खून एवं यूरिन टेस्ट नहीं हेा पाता है.
एंबुलेंस कुड़ू में रहता है
कैरो स्वास्थ्य उपकेंद्र को तत्कालीन विधायक कमल किशोर भगत द्वारा मरीजों की सुविधा के लिए एंबुलेंस मुहैया कराया गया था, लेकिन रख रखाव एवं कर्मियों की कमी के कारण एंबुलेंस कुडू में रखा गया है. कुछ दिन पूर्व एंबुलेंस कैरो में भी रखा गया था लेकिन रखने की असुविधा एवं ड्राइवर के अभाव में एंबुलेंस बेकार साबित होने लगा जिसके बाद एंबुलेंस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुडू को सौंप दिया गया है. एंबुलेंस नहीं रहने के संबंध में डॉ राकेश कुमार ने बताया कि यहां मेंटेनेंस के अभाव में एंबुलेंस नहीं रखा गया है. एंबुलेंस कुडू में है और जैसे ही मरीजों को गाड़ी की आवश्यकता होती है एंबुलेंस मंगा लिया जाता है.
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