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डीवीसी कोल ब्लॉक के लिए जमीन नहीं देने पर अड़े 6 गांवों के ग्रामीण, 1100 एकड़ जमीन अधिग्रहण का है मामला

Updated at : 27 Sep 2020 3:29 PM (IST)
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डीवीसी कोल ब्लॉक के लिए जमीन नहीं देने पर अड़े 6 गांवों के ग्रामीण, 1100 एकड़ जमीन अधिग्रहण का है मामला

Jharkhand news, Latehar news : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित दामोदर घाटी निगम (DVC) कोल ब्लॉक (Coal Block) को रद्द करने को लेकर 6 गांव के ग्रामीण आंदोलन के मूड में हैं. इस दौरान किसी भी कीमत पर रैयत अपनी जमीन डीवीसी को नहीं देने का बात दोहरा रहे हैं. सदर प्रखंड के 2 पंचायत के इन 6 गांवों में कोल ब्लॉक प्रस्तावित किया है. इन 6 गांवों में कुल 1100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है.

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Jharkhand news, Latehar news : लातेहार (चंद्रप्रकाश सिंह) : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित दामोदर घाटी निगम (DVC) कोल ब्लॉक (Coal Block) को रद्द करने को लेकर 6 गांव के ग्रामीण आंदोलन के मूड में हैं. इस दौरान किसी भी कीमत पर रैयत अपनी जमीन डीवीसी को नहीं देने का बात दोहरा रहे हैं. सदर प्रखंड के 2 पंचायत के इन 6 गांवों में कोल ब्लॉक प्रस्तावित किया है. इन 6 गांवों में कुल 1100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है.

क्या है मामला

केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में डीवीसी को सदर प्रखंड के 2 पंचायत के 6 गांवों में कोल ब्लॉक प्रस्तावित किया है. इन 6 गांवों में कुल 1100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. इसमें 432 एकड़ जमीन वन भूमि है, जिसका अधिग्रहण कंपनी ने कर लिया है. इधर, इन 6 गांवों में तुबेद, धोबियाझारण, मंगरा, अंबाझारण, नेवाडी और डीही शामिल है. शेष 668 एकड़ जमीन के लिए कंपनी को 6 गांवों के रैयतों से अधिग्रहण करना है.

जमीन नहीं देने के विरोध में हुई बैठक

रविवार (27 सितंबर, 2020) को सदर प्रखंड के अंबाझारण के नीम टांड में ग्राम प्रधान सहादेव उरांव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. अदि हक भूमि सुरक्षा मोरचा तुबेद के बैनर तले आयोजित बैठक में जमीन के रैयतों ने जान देंगे, पर जमीन नही देंगे का नारा बुलंद किया. इस दौरान नगाड़ा, मांदर और घंटा बजा कर कंपनी का विरोध जताया.

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मौके पर श्री उरांव ने कहा कि हमारे बाप- दादा इसी जमीन को हमारे भरोसे छोड़ कर गये हैं, जिस पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. ऐसे में केंद्र सरकार ने डीवीसी को कोयला खनन के लिए देने का निर्णय लिया है, जिसका विरोध किया जा रहा है. जमीन कोई भी रैयत नहीं देना चाहते हैं. बावजूद इसके कंपनी के अधिकारी जबरन जमीन देने का दबाव बना रहे हैं.

सुखदेव उरांव ने कहा कि जमीन पर किसान का अधिकार होता है. हमारी कई पीढ़ी इसी जमीन पर खेती करते आ रहे हैं. कोल ब्लॉक के नाम पर ग्रामीणों की जमीन को हथियाने का उपाय सरकार द्वारा किया जा रहा है. हम किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे. वहीं, सरोमणी मिंज ने कहा कि गांव में खेती कर गुजारा करते हैं. जमीन कंपनी को दे देंगे, तो खेती कैसे करेंगे. इसलिए हम किसी कीमत पर अपनी जमीन नहीं बेचना चाहते हैं.

गांव में बैठक कर सभी ने यह निर्णय लिया है कि कोई भी रैयत अपनी जमीन नहीं बेचना चाहते हैं. जान देंगे, पर जमीन नही देंगे. बैठक में पूर्व मुखिया अमरेश उरांव, रामानंद उरांव, बुन्नू उरांव, बाबूलाल उरांव, सोनामणी देवी, सुधीर उरांव, बुधदेव उरांव समेत काफी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थित थे.

Posted By : Samir Ranjan.

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