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कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने का विरोध संवैधानिक रूप से उचित

Updated at : 14 Oct 2025 9:41 PM (IST)
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कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने का विरोध संवैधानिक रूप से उचित

कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने का विरोध संवैधानिक रूप से उचित

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लातेहार ़ संयुक्त आदिवासी समिति के तत्वावधान में मंगलवार को कुरमी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के विरोध में आदिवासी आक्रोश रैली निकाली गयी. रैली माको मोड़ से शुरू होकर मेन रोड होते हुए समाहरणालय परिसर पहुंची, जहां यह एक सभा में तब्दील हो गयी. सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री देव कुमार धान ने कहा कि कुरमी जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का प्रयास असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूची के अनुच्छेद 24(1) के तहत आदिवासी समुदाय की परंपराओं और अधिकारों की रक्षा की गयी है. ऐसे में कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने का विरोध संवैधानिक रूप से उचित है. आदिवासी समन्वय समिति के सेलेस्टीन कुजूर ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल नहीं होने दिया जायेगा, क्योंकि यह जन, जंगल और जमीन व आदिवासियों के अस्तित्व से जुड़ा मामला है. जिला पड़हा समिति के सचिव बिरसा मुंडा ने कहा कि कुरमी समाज आदिवासी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ा नहीं है, इसलिए इसे आदिवासी दर्जा देना अनुचित है. रैली में शामिल लोगों ने कुरमी जाति को आदिवासी में शामिल नहीं किया जाये और बिरसा मुंडा जिंदाबाद जैसे नारे लगाये. बाद में राज्यपाल को संबोधित दो सूत्री मांग पत्र उपायुक्त को सौंपा गया. मौके पर जिप सदस्य विनोद उरांव, सरोज लोहरा, आर्सेन तिर्की, मनोज उरांव, रिंकू कच्छप सहित काफी संख्या में महिला-पुरुष मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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