कोयल सरसों तेल पीटीआर को दिलायेगी पहचान

Updated at : 22 Feb 2025 8:19 PM (IST)
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कोयल सरसों तेल पीटीआर को दिलायेगी पहचान

पलामू टाइगर रिजर्व के जंगली इलाके से सटे गांवों में सरसों से निकाले गये कोयल सरसों तेल को पहचान दिलाने की कवायद शुरू की गयी है.

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बेतला. पलामू टाइगर रिजर्व के जंगली इलाके से सटे गांवों में सरसों से निकाले गये कोयल सरसों तेल को पहचान दिलाने की कवायद शुरू की गयी है. पलामू टाइगर रिजर्व के इको डेवलपमेंट कमेटी की ओर से कोयल कोल्ड प्रेस्ड मस्टर्ड ऑयल को लांच किया गया है. जिस तरह जंगलों से निकाले गये शहद को हेनार हनी नाम के ब्रांड से बेचा जा रहा है, उसी तरह जंगल से सटे गांवों से सरसों की खरीद कर इसके तेल को पारंपरिक लकड़ी के प्रेसवे (कोल्हू) का उपयोग कर निकाला जाता है. इससे पोषण बरकरार रहता है. प्रीमियम पैकेजिंग के साथ, उच्च गुणवत्ता वाला सरसों का तेल 400 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर बेचने की तैयारी है. विभागीय पदाधिकारियों की मानें, तो इससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा. उनकी आमदनी भी बढ़ेगी. वोकल फॉर लोकल के विचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे बड़ा रूप देने का प्रयास किया जा रहा है. राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, लातेहार उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता व डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने इसकी शुरुआत पिछले दिनों की. बताया जाता है कि बेतला इलाके में इस तेल की अच्छी डिमांड होगी. वहीं बाहर से आनेवाले पर्यटक भी शहद के साथ-साथ अब सरसों तेल को अपने साथ ले जा सकेंगे. इससे पीटीआर की अलग पहचान बनेगी. 120 से अधिक गांवों में होती है सरसों की खेती: 1129 वर्ग किलोमीटर में फैले पीटीआर की परिधि में करीब 200 गांव हैं. इनमें कई गांवों में सरसों की अच्छी खेती होती है. जंगली वातावरण होने के कारण सरसों की फसल लहलहाती रहती है. कोई ब्रांडिंग मार्केट नहीं होने के कारण यह सरसों महाजनों द्वारा कम दामों में खरीद लिया जाता है. इस कारण इस क्षेत्र के ग्रामीण किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है. लेकिन अब सरसों तेल की ब्रांडिंग होने से निश्चित रूप से यहां के किसानों को इसका पूरा लाभ मिलेगा. साथ ही साथ लोगों को शुद्ध सरसों का तेल भी मिल सकेगा. क्या कहते हैं डिप्टी डायरेक्टर: पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने कहा कि हेनार की जंगली शहद के साथ अब नया लांच किया गया कोयल सरसों का तेल पलामू टाइगर रिजर्व के दो लोकप्रिय उत्पाद बन गये हैं. जंगली जानवरों की सुरक्षा के साथ-साथ जन भागीदारी कार्यक्रम के तहत स्थानीय लोगों को आजीविका को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है.

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