खबर छपने के बाद जिला परिषद ने की खानापूर्ति, निकाली गयी पुन: निविदा

जिला परिषद विभाग की उदासीनता, स्थानीय लोगों के वर्चस्व व अहम को लेकर प्रखंड मुख्यालय में लगनेवाले प्रसिद्ध चैती हरैया पशु मेला के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है
चंदवा. जिला परिषद विभाग की उदासीनता, स्थानीय लोगों के वर्चस्व व अहम को लेकर प्रखंड मुख्यालय में लगनेवाले प्रसिद्ध चैती हरैया पशु मेला के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है. बुधवार को इस मुद्दे को प्रभात खबर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था. जिला परिषद उपाध्यक्ष अनिता देवी ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया था. इसके बाद आनन-फानन में विभाग की ओर से आठ अप्रैल की तिथि में एक बार फिर से निविदा निकाली गयी है. 16 अप्रैल को डाक की तिथि रखी गयी है. उक्त निविदा में विभाग द्वारा खानापूर्ति स्पष्ट दिख रही है. गौर करनेवाली बात यह कि चैत माह में लगनेवाले वार्षिक हरैया पशु मेला लगने का समय करीब-करीब खत्म हो चुका है. इसके बाद भी होली 2026 तक के लिए शुक्रवारीय साप्ताहिक बाजार, चैत पशु हरैया मेला व श्रावणी मेला को मिलाकर एकसाथ निविदा निकाली गयी है. इसके लिए सैरात की राशि 30 लाख 89 हजार 763 निर्धारित की गयी है. इसके अलावा चंदवा बस स्टैंड के लिए (31 मार्च 2026 तक के लिए) 25 लाख 84 हजार 290 रुपये की बंदोबस्ती राशि निर्धारित की गयी है.
निविदा जारी होने के बाद फिर से स्थानीय लोगों ने इस पर सवाल खड़ा किया है. लोगों का कहना है कि यह महज खानापूर्ति की जा रही है. राशि अधिक होने के कारण इस बार भी कम ही उम्मीद है कि डाक प्रक्रिया पूर्ण हो पाये. इसका मुख्य कारण यह है कि निविदा में होली तक का ही समय दिया गया है. चैत मेला होली के बाद ही लगता है. ऐसे में इस समय अवधि में मेला नहीं लग पायेगा. लोगों का स्पष्ट कहना था कि विभाग चैत मेला, साप्ताहिक हाट व श्रावणी मेला का अलग-अलग निविदा क्यों नहीं निकालती है. यहीं हाल यहां बस स्टैंड को लेकर भी है. पिछले कई वर्षों से बस पड़ाव की निविदा निकलने के बाद भी कोई खरीदार आगे नहीं आ रहे है, बावजूद राशि हर वर्ष बढ़ती ही जा रही है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जिला परिषद विभाग के अधिकारी व पंचायत प्रतिनिधि इस व्यवस्था में क्या कुछ कर पाते हैं.
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