अंबाकोठी मुहल्ला : 51 वर्षों से आपसी सौहार्द की मिसाल

राम-रहीम की पूजा से जगमगाता है सांप्रदायिक एकता का संगम
राम-रहीम की पूजा से जगमगाता है सांप्रदायिक एकता का संगम
चंद्रप्रकाश सिंह,लातेहार
जिला मुख्यालय का अंबाकोठी मुहल्ला आपसी सौहार्द का प्रतीक बन गया है. यहां पिछले 51 वर्षों से श्रीरामचरित मानस नवाह्न परायण पाठ महायज्ञ का आयोजन हो रहा है. इस वर्ष 22 सितंबर से 52वां अधिवेशन प्रारंभ किया गया है. इन वर्षों में हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एक साथ नवरात्र में राम-रहीम की पूजा करते हैं, जो एक अनूठा संयोग है. दोनों समुदायों ने यहां सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है. अब तक कभी भी किसी प्रकार का मनमुटाव या तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है. नवरात्र के अवसर पर शुक्रवार को जामा मस्जिद में नमाज के समय महायज्ञ समिति लाउडस्पीकर को बंद कर देती है या उसकी आवाज धीमी कर देती है. खास बात यह है कि अंबाकोठी में जामा मस्जिद के आसपास मुस्लिम समुदाय का एक भी घर नहीं है. बावजूद इसके हर शुक्रवार को बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग यहां नमाज अदा करने आते हैं. महायज्ञ समिति के अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिंह और महामंत्री सुदामा प्रसाद ने बताया कि वर्ष 1974 में इस आयोजन पर मात्र सात हजार रुपये खर्च हुए थे. लेकिन आज आयोजन का खर्च 11 लाख रुपये से अधिक हो गया है.
पुरानी पद्धति से होती है पूजायज्ञ की शुरुआत में पहले दर्जनभर महिलाएं और पुरोहित ही पाठ में बैठते थे. अब इसमें 351 महिला पाठकर्ता और कुवारी कन्याएं शामिल होती हैं. महामंत्री सुदामा प्रसाद ने बताया कि रामायण पाठ की परंपरा आज भी वैसे ही निभायी जा रही है, जैसे शुरुआती दौर में थी. सुबह पांच बजे से सात बजे तक पूजा-अर्चना होती है. उसके बाद आठ से दो बजे तक श्रीरामचरित मानस का पाठ होता है. शाम को आरती और रात में नाटकों का मंचन किया जाता है.
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