श्रमदान कर बना पुल, दर्जनों गांव की लाइफ-लाइन

Updated at : 01 Dec 2016 8:22 AM (IST)
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श्रमदान कर बना पुल, दर्जनों गांव की लाइफ-लाइन

अजय वैद्य‍/सुमित कुमार चंदवा : प्रखंड के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं. बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर नहीं जा रहा है. दो वर्ष पहले हुटाप पंचायत स्थित एकमहुआ व भदइटांड़ टोला को जोड़ने के लिए नाले पर बना पुल (जैलु बांध) भारी बारिश में बह गया था. […]

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अजय वैद्य‍/सुमित कुमार
चंदवा : प्रखंड के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं. बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर नहीं जा रहा है. दो वर्ष पहले हुटाप पंचायत स्थित एकमहुआ व भदइटांड़ टोला को जोड़ने के लिए नाले पर बना पुल (जैलु बांध) भारी बारिश में बह गया था. पुल बनाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार गुहार लगायी, लेकिन किसी ने सुधी नहीं ली. बाद में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर श्रमदान से नाला पर लकड़ी का पुल बना दिया. इसी पुल से भदइटांड़ के अलावा तुरूवा, हक्का, सहिलतवा, कुम्हीआटा, तावापानी, असनाही, बरहजमुआ, अमवाटांड़, तोरार समेत दर्जनों गांव के सैकड़ों लोग व विद्यार्थी आवागमन करते हैं. इन गांव के लोगों को चंदवा आने के लिए यह पुल पार करना होता है.
मुख्यमंत्री के आगमन की सुनकर लोगों की उम्मीद जागी है. लोगों ने जल्द से जल्द नाले पर पुल निर्माण की मांग मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन से की है. ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में नाला पर पुल बना था. करीब दो वर्ष पूर्व पुल बारिश में ध्वस्त हो गया. इसके टूट जाने से दर्जनों गांव का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कट गया. बार-बार प्रखंड प्रशासन को सूचना देने के बाद भी पुल निर्माण का काम नहीं हो पाया. अंतत: ग्रामीण एकजुट हुए और चंदा इकठ्ठा किया. मेहनत कर खुद से नाला पर लकड़ी का पुल बना डाला. इस पुल से मालवाहक ऑटो भी पार कर जाते हैं.
ग्रामीणों ने लकड़ी का पुल बना तो लिया है पर यह कभी भी टूट सकता है. इस संबंध में तुरूवा गांव निवासी रमेश साव ने बताया कि रोजाना इस मार्ग से चंदवा आना-जाना करते हैं. दो वर्ष से यह स्थिति है. प्रखंड प्रशासन व विधायक-नेता किसी को इसकी सुधी नहीं है. भदईटांड़ के रहने वाले शुभम कुमार ने बताया कि वे ख्रीस्त राजा उच्च विद्यालय के विद्यार्थी है. रोज इसी सड़क से चंदवा जाते हैं. बारिश के दिनों में पथ पर कीचड़ हो जाने से साइकिल चलाना भी मुश्किल हो जाता है. प्रतिदिन स्कूल देरी से पहुंचते हैं. भुनेश्वर गंझू ने बताया कि असनाही गांव में ही खेती-बारी कर जीविकोपार्जन करता हैं.
पथ व पुल की दयनीय स्थिति के कारण सब्जी को चंदवा बाजार ले जाना टेढ़ी खीर है. प्रभु सहाय तोपनो ने बताया कि लकड़ी का पुल बनाकर किसी तरह काम निकाला जा रहा है. प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए. इनके अलावा गणेश साव, बिसु मुंडा, छठू गंझू समेत दर्जनों लोगों ने पंचायत प्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है.
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