खर्च 30 लाख, सिंचाई एक इंच भी नहीं

Updated at : 05 Feb 2016 7:28 AM (IST)
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खर्च 30 लाख, सिंचाई एक इंच भी नहीं

सुनील कुमार लातेहार : घघरी ग्राम में जल पथ प्रमंडल मेदिनीनगर द्वारा करीब 30 लाख रुपये की लागत से बीयर बनाया गया है. लुगफीची नाला से घघरी के पांच सौ हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई का लक्ष्य था. पर, यहां से एक इंच भूमि की भी सिंचाई नहीं हो पायी है. किसानों का कहना है कि […]

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सुनील कुमार
लातेहार : घघरी ग्राम में जल पथ प्रमंडल मेदिनीनगर द्वारा करीब 30 लाख रुपये की लागत से बीयर बनाया गया है. लुगफीची नाला से घघरी के पांच सौ हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई का लक्ष्य था. पर, यहां से एक इंच भूमि की भी सिंचाई नहीं हो पायी है. किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हें ठगा है.
लुगफीची नाला पर महज टॉप ढलाई कर बड़ी राशि की निकासी कर ली गयी है. बीयर के उत्तरी मुहाने पर गेट लगाया गया है, जो कभी भी नहीं खुला, क्योंकि पानी जमा हुआ ही नहीं. दिखावे के लिए स्लीप- वे गेट गाड़ दिया गया है.
चार कराेड़ खर्च सिंचाई शून्य
जल पथ प्रमंडल द्वारा लातेहार सदर प्रखंड के घघरी, चंदवा प्रखंड के रामघाट व महुआडांड़ प्रखंड के नकटीनाला व बिरहा नाला में में गड़बड़ी की शिकायत है. इन परियोजनाओं पर चार करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं, लेकिन सिंचाई शून्य है.
स्थलीय जांच करा कर करेंगे कार्रवाई
उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने कहा कि इस योजना की वह स्थल जांच करायेंगे. दोषियों पर कार्रवाई करेंगे. उन्हाें लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता को जांच करने का आदेश दिया है.
एक फसल की भी नहीं हुई पटवन
घघरी के किसान धनेश्वर सिंह, नटाई सिंह, छठू सिंह, चौठ सिंह, रोइन सिंह, एतवा सिंह, सुरेश सिंह, दिनू सिंह, प्रमुख खरवार, तुलसी सिंह सोहराई सिंह का कहना है कि वर्ष 2012-13 में जलपथ के अभियंताआें ने फरजी ग्राम सभा कर उनसे सिंचाई व्यस्था बहाल कराने का आश्वासन दिया था. काफी पुरानी इस योजना को नया रूप देने की बात कही थी. योजना पर पूरा काम होता, तो घघरी गांव की सूरत ही अलग होती.
क्या कहते हैं विभागीय अभियंता
सिंचाई विभाग के मॉनिटरिंग प्रमंडल का कहना है कि यह योजना काफी पुरानी है. इसकी रखरखाव की जवाबदेही मॉनिटरिंग विंग को जल पथ प्रमंडल पलामू द्वारा दी गयी है. सहायक अभियंता एसएस सुमन ने कहा कि यह योजना 1960 से ही चल रही है. वर्ष 2012-13 में जल पथ प्रमंडल द्वारा उनके प्रमंडल को यह योजना सौंपी गयी. उनका काम इसका रखरखाव एवं सिंचाई की सुविधा बहाल कराना मात्र है.
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