जमीन नहीं बिकी, इलाज के अभाव में मौत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Mar 2015 12:53 AM (IST)
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अवर निबंधन कार्यालय ने डीड पर स्टांप लगा कर व शुल्क की गणना कर जहीर मियां को वापस किया 27 जनवरी से जिले में भूमि निबंधन बंद है इलाज के लिए करीब तीन लाख रुपये की जरूरत थी दो लाख सत्तर हजार रुपये में तय हुई थी जमीन की बिक्री सुनील कुमार लातेहार : लातेहार […]
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अवर निबंधन कार्यालय ने डीड पर स्टांप लगा कर व शुल्क की गणना कर जहीर मियां को वापस किया
27 जनवरी से जिले में भूमि निबंधन बंद है
इलाज के लिए करीब तीन लाख रुपये की जरूरत थी
दो लाख सत्तर हजार रुपये में तय हुई थी जमीन की बिक्री
सुनील कुमार
लातेहार : लातेहार अवर निबंधन कार्यालय द्वारा बगैर किसी वजह के इजहार किये गये दो दस्तावेजों को शासकीय स्टांप लगा कर एवं शुल्क की गणना कर बिना निबंधन के ही विक्रेता को वापस करने का मामला प्रकाश में आया है.
27 जनवरी से जिले में बंद भूमि निबंधन की वजह की पड़ताल के क्रम में प्रभात खबर को दो ऐसे दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, जिसे विक्रेता जहीर मियां उर्फ जहीरउद्दीन मियां वल्द करीमन मियां ने निबंधन के लिए 17 जनवरी 2015 को अवर निबंधन कार्यालय लातेहार में पेश किया था. विक्रेता ने अपनी बीमारी के इलाज के लिए करकट ग्राम स्थित अपनी भूमि की दो लाख 70 हजार रुपये मूल्य में बिक्री का खुलासा डीड में किया था. उक्त डीडों को दस्तावेज नवीस मो शकील एवं विपिन बिहारी ठाकुर ने निबंधन हेतु पेश किया था.
आश्चर्य तो यह है कि निबंधन कार्यालय ने दोनों डीड को तैयार किया. बाकायदा शुल्क गणना दर्ज की और उसे उस वक्त वापस कर दिया गया जब विक्रेता को निबंधक पुष्कर सिंह मुंडा के समक्ष पेश किया गया. दस्तावेज नवीसों ने जब निबंधन नहीं होने का कारण पूछा, तो निबंधन कर्मियों ने अपर समाहर्ता द्वारा मौखिक रोक लगाने की बात कही.
(निबंधन कार्यालय कर्मियों एवं डीड राइटर के बीच हुई बातचीत का फोनो टेप प्रभात खबर के पास उपलब्ध है). जब यह मामला तूल पकड़ने लगा, तो आनन फानन में डीड पेश होने के 15 दिनों के बाद अवर निबंधन पदाधिकारी पुष्कर सिंह मुंडा ने अपने पत्रंक 17 दिनांक 31.01.2015 के हवाले से दस्तावेज नवीस मो शकील एवं विपिन बिहारी ठाकुर को स्पष्टीकरण जारी किया. बताया कि उन्होंने जो दस्तावेज 17 जनवरी को निबंधन हेतु पेश किया था. जिसकी निबंधन वाली भूमि बंदोबस्ती भूमि थी और इसके लिए डीड लिखने वाला दोषी है. इतना ही नहीं उसे दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने पर विधि सम्मत कार्रवाई की भी चेतावनी दी गयी.
किसी भी कार्यालय को कोई मौखिक आदेश नहीं दिया : एसी
इस बाबत पूछे जाने पर अपर समाहर्ता अनिल कुमार ने कहा कि उन्होंने भूमि निबंधन पर रोक से संबंधित कोई मौखिक आदेश किसी भी कार्यालय को नहीं दिया है. हां, कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिदायत जरूर दी है. श्री कुमार ने आगे कहा कि उन्होंने अपने पत्रंक 113/रा दिनांक 19.02.15 के माध्यम से सीएनटी एक्ट की धारा 49 के तहत आनेवाली भूमि के निबंधन पर रोक लगायी है. बगैर निबंधन के कार्यालय का स्टांप एवं शुल्क की गणना करके डीड वापस करने की बात से उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि निबंधक ही कारण बता सकते हैं.
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