व्यय का ब्योरा नहीं देना पड़ सकता है भारी

निकाय चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं.
ब्योरा नहीं देने वाले प्रत्याशी 3 साल तक चुनाव नहीं लड़ पायेंगे कोडरमा. निकाय चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पद के प्रत्याशियों को केवल प्रचार में ही नहीं, बल्कि चुनावी खर्च के ब्योरे को लेकर भी पूरी गंभीरता बरतनी होगी. व्यय का ब्योरा नहीं देने वाले प्रत्याशी 3 साल तक चुनाव नहीं लड़ पायेंगे, जो प्रत्याशी खर्च का ब्योरा जमा नहीं करेंगे या गलत ब्योरा देंगे, जीतने के बाद भी उनका अभ्यर्थन रद्द किया जा सकता है और अगले तीन वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक लगायी जा सकती है. झुमरीतिलैया नगर परिषद के अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को अधिकतम छह लाख तक खर्च करने की अनुमति दी गई है. वहीं वार्ड पार्षद पद के उम्मीदवार अधिकतम 1.5 रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे. अधिक खर्च करना न सिर्फ नियम का उल्लंघन माना जायेगा, बल्कि यह प्रत्याशी की मुश्किलें भी बढ़ा सकता है. व्यय कोषांग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिया कि उन्हें चुनावी अभियान के दौरान तीन बार अपने खर्च का विस्तृत ब्योरा जमा करना होगा. 12 फरवरी को प्रत्याशियों ने ब्यौरा दिया है, जबकि 16 और 20 फरवरी की तिथियां निर्धारित की गयी हैं. इन तिथियों पर प्रचार, सभा, जुलूस, पोस्टर, बैनर, वाहन, सोशल मीडिया प्रचार समेत सभी मदों में किये गये खर्च का विवरण पेश करना होगा. खर्च का हिसाब नहीं तो प्रचार भी नहीं यदि नहीं करता है तो उसपर तत्काल कार्रवाई की जायेगी. ऐसे प्रत्याशियों को आगे किसी भी तरह की सभा, सम्मेलन, जुलूस या अन्य प्रचार गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जायेगी.
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