दक्षिण बंगाल से उत्तर बंगाल तक नई रफ्तार, सीमांचल को मिलेगी बड़ी सौगात

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दक्षिण बंगाल से उत्तर बंगाल तक नई रफ्तार, सीमांचल को मिलेगी बड़ी सौगात

प्रस्तावित मोरग्राम किशनगंज एक्सप्रेस वे मार्ग | Prabhat Khabar Network

मोरेग्राम-किशनगंज हाई स्पीड कॉरिडोर से दक्षिण और उत्तर बंगाल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। जानिए सीमांचल के लिए यह परियोजना क्यों है बेहद खास।

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दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल के बीच सड़क संपर्क को और तेज व सुगम बनाने के उद्देश्य से 244 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मोरेग्राम–किशनगंज हाई स्पीड कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) की योजना चर्चा में है. यह प्रस्तावित कॉरिडोर पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के सीमांचल क्षेत्र को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. इसके निर्माण से कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज सहित सीमांचल के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है. यह होगा प्रस्तावित नया मार्ग प्रस्तावित योजना के अनुसार एक्सप्रेसवे पश्चिम बंगाल के मोरेग्राम से शुरू होकर इस्लामपुर की ओर बढ़ेगा. इसके बाद झारखंड के राजमहल और पश्चिम बंगाल के मानिकचक के बीच प्रस्तावित गंगा पुल को पार करेगा.

कटिहार से किशनगंज तक बनेगा नया एक्सप्रेसवे

बिहार में यह कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड के पासोल गांव से प्रवेश करेगा. यहां से आजमनगर और कदवा प्रखंड से गुजरते हुए लगभग 38.4 किलोमीटर की दूरी तय करेगा. इसके बाद फुलहर नदी पार कर पूर्णिया जिले में प्रवेश करेगा, जहां इसकी लंबाई लगभग 41.6 किलोमीटर होगी. आगे यह किशनगंज जिले में प्रवेश कर लगभग 19.5 किलोमीटर का सफर तय करेगा और किशनगंज में प्रस्तावित सिलीगुड़ी–गोरखपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा. वर्तमान में इस मार्ग से होती है यात्रा वर्तमान में किशनगंज से मोरेग्राम जाने के लिए यात्री मुख्य रूप से एनएच-27 और एनएच-12 (पुराना एनएच-34) का उपयोग करते हैं. यह मार्ग किशनगंज से रायगंज, गाजोल, मालदा और फरक्का बैराज होते हुए मोरेग्राम तक पहुंचता है. इस सड़क की कुल लंबाई लगभग 200 से 220 किलोमीटर है और सामान्य परिस्थितियों में यात्रा पूरी करने में पांच से छह घंटे का समय लगता है. पुराने मार्ग की सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा मार्ग की सबसे बड़ी समस्या फरक्का बैराज पर लगने वाला ट्रैफिक जाम है. इसके अलावा मालदा, रायगंज सहित कई कस्बों और बाजारों से होकर गुजरने के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी रहती है.

हाई स्पीड कॉरिडोर से बढ़ेगा व्यापार और निवेश

भारी वाहनों की आवाजाही और स्थानीय यातायात का दबाव भी यात्रा समय बढ़ा देता है. क्यों महत्वपूर्ण है नया कॉरिडोर प्रस्तावित मोरेग्राम–किशनगंज हाई स्पीड कॉरिडोर दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल के बीच एक वैकल्पिक हाई स्पीड सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा. इससे पश्चिम बंगाल से सटे बिहार के सीमांचल क्षेत्र के कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है. बेहतर सड़क संपर्क से कृषि, व्यापार, उद्योग, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और निवेश को नई गति मिल सकती है.

कोलकाता का सफर होगा और आसान

साथ ही झारखंड और सीमांचल के बीच आवागमन भी अधिक सुगम होने की संभावना है. कोलकाता की दूरी होगी कम परियोजना पूरी होने के बाद किशनगंज से कोलकाता की यात्रा लगभग पांच घंटे में पूरी होने की संभावना जताई जा रही है. इससे सीमांचल के लोगों को दक्षिण बंगाल तक तेज और सुविधाजनक सड़क संपर्क मिलेगा, जबकि माल परिवहन भी पहले की तुलना में अधिक तेज और कम समय में हो सकेगा. फिलहाल प्रस्तावित है परियोजना हालांकि मोरेग्राम–किशनगंज हाई स्पीड कॉरिडोर अभी प्रस्तावित परियोजना है. इसके निर्माण से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी तथा अन्य वैधानिक स्वीकृतियां पूरी की जानी हैं. परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद ही सीमांचल को इसके व्यापक आर्थिक और सामाजिक लाभ प्राप्त हो सकेंगे.


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बच्छराज

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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