कोडरमा के जयनगर में आधी रात को मौत बनकर आया हाथियों का झुंड: दो को उतारा मौत के घाट, 3 घायल

घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीण और रोता बिलखता मृतक का परिजन
Koderma Elephant Attack: कोडरमा के जयनगर में जंगली हाथियों ने मंगलवार की रात मौत का तांडव मचाया है. कंझियाडीह और खगराडीह स्थित ईंट भट्ठों पर हमला कर हाथियों ने एक मजदूर और 10 साल के मासूम को मौत के घाट उतार दिया. इस हमले में महिलाओं और बच्चों समेत तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं.
Koderma Elephant Attack, कोडरमा, (विकास कुमार की रिपोर्ट): कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार की रात हाथियों के झुंड ने दो अलग-अलग गांवों में धावा बोलकर भारी तबाही मचाई. इस घटना में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे एक मजदूर और एक 10 वर्षीय बच्चे की कुचलकर दर्दनाक मौत हो गई. हाथियों के हमले के बाद पूरे इलाके में चीख पुकार मच हुई है और ग्रामीणों का वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है.
पहली घटना: कंझियाडीह में मजदूर की मौत
जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 11:30 बजे हाथियों का झुंड कंझियाडीह स्थित मुंशी साव के ईंट भट्ठे पर पहुंचा. यहां झोपड़ी में सो रहे 30 वर्षीय मजदूर राजकुमार मांझी (निवासी फतेहपुर, बिहार) को हाथियों ने अपनी चपेट में ले लिया और कुचलकर मार डाला. इस दौरान बीच-बचाव करने आई उसकी पत्नी गौरी देवी पर भी हाथियों ने हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई.
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दूसरी घटना: मासूम को भी नहीं बख्शा
कंझियाडीह में तांडव मचाने के बाद हाथियों का झुंड देर रात करीब 1 बजे खगराडीह के खोसा पहाड़ी स्थित एक अन्य भट्ठे पर पहुंचा. यहां हाथियों ने 10 वर्षीय मासूम अंकुश कुमार को बेरहमी से कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इस हमले में बच्चे की मां कारी देवी और उसका ढाई वर्षीय छोटा भाई भी घायल हो गए. बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार बिहार के हिसुआ क्षेत्र का रहने वाला है और यहां मजदूरी के लिए आया था.
एक महीने में चौथी बलि, प्रशासन पर उठे सवाल
कोडरमा में मानव और हाथी के बीच संघर्ष अब चरम पर है. पिछले मात्र एक महीने के भीतर मरियमपुर, बोनकाली, मरकच्चो और सतगांव के बाद अब जयनगर में यह चौथी मौत है. एक दिन पूर्व ही डोमचांच के काराखुट में हाथियों ने एक स्कूल और ईंट फैक्ट्री को क्षतिग्रस्त कर दिया था. लगातार हो रहे हमलों के बावजूद वन विभाग हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर रखने में विफल साबित हो रहा है.
मुआवजा और दहशत का माहौल
घटना की सूचना पर वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत राशि प्रदान की और घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा. हालांकि, ग्रामीण अब केवल मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर हाथियों के झुंड को जल्द जंगलों की ओर नहीं खदेड़ा गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे.
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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