हाथियों का झुंड पहुंचा खरपोक, खेतों में लगे फसलों को रौंदा, खौफ में ग्रामीण

गांव की सुखनी देवी ने बताया कि हाथियों के इस गांव में आने का सिलसिला वर्ष 2013 से चलता आ रहा है. हर साल गर्मी के मौसम में हाथियों का झुंड गांव आकर फसलों को बर्बाद कर देता है. इस वर्ष सब्जी की खेती को हाथियों ने बर्बाद कर दिया. सुखनी ने वन विभाग से उचित मुआवजा की मांग की है. वहीं लीलावती देवी ने बताया कि पिछले वर्ष हाथियों ने उसका घर तोड़ दिया था. फसलों को क्षति पहुंचायी थी. दहशत के कारण वे लोग रतजगा करने के विवश है. किशुन यादव ने बताया कि उसने 15 कट्टा में गन्ना तथा 22 कट्टा में गेहूं लगाया था.
प्रखंड के ग्राम खरपोका में हाथियों के झुंड के अपने से ग्रामीण रतजगा करने को विवश हैं. जानकारी के मुताबिक छुतहरी कटिया से जतघघरा होते हुए हाथियों का झुंड खरपोका जंगल पहुंचा है.शाम में ग्रामीणों ने पटाखा व मशाल की मदद से हाथियों को भगाया. मगर रात होते ही 24 हाथियों का झुंड फिर से खरपोका पहुंच गया. हाथी 60 एकड़ में लगे गन्ना के खेत में डेरा डाले हुए है. हाथियों ने गन्ने की फसल के साथ 65 एकड़ में लगे गेहूं, प्याज व सब्जियों की फसल को रौंद कर बर्बाद कर दिया. भाजपा के पूर्व जिला मंत्री विनोद यादव की सूचना पर वन विभाग व पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. हालांकि, समाचार लिखे जाने तक हाथियों को वहां से भगाया नहीं जा सका था. हाथियों के भय से ग्रामीण रतजगा कर रहे हैं.
गांव की सुखनी देवी ने बताया कि हाथियों के इस गांव में आने का सिलसिला वर्ष 2013 से चलता आ रहा है. हर साल गर्मी के मौसम में हाथियों का झुंड गांव आकर फसलों को बर्बाद कर देता है. इस वर्ष सब्जी की खेती को हाथियों ने बर्बाद कर दिया. सुखनी ने वन विभाग से उचित मुआवजा की मांग की है. वहीं लीलावती देवी ने बताया कि पिछले वर्ष हाथियों ने उसका घर तोड़ दिया था. फसलों को क्षति पहुंचायी थी. दहशत के कारण वे लोग रतजगा करने के विवश है. किशुन यादव ने बताया कि उसने 15 कट्टा में गन्ना तथा 22 कट्टा में गेहूं लगाया था.
शनिवार रात हाथियों के झुंड ने पूरे फसल को रौंद कर बर्बाद कर दिया. वहीं बैजनाथ यादव ने बताया कि तीन जगह पर 17 कट्टा में गन्ना तथा 20 कट्टा में गेहूं लगाया था. हाथियों ने सब बर्बाद कर दिया. अब परिवार के भरण पोषण की समस्या उत्पन्न हो गयी है. भाजपा के पूर्व जिला मंत्री विनोद यादव ने वन विभाग से किसानों को क्षतिपूर्ति मुआवजा देने तथा जंगल में चेक डैम व डोभा बनाने की मांग की है, ताकि पानी की तलाश में जंगली जानवरों को गांव की तरफ नहीं आना पड़े.
Posted By : Sameer Oraon
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