प्रशासन ने ही दिया वसूली का लाइसेंस

Published at :25 Oct 2013 2:22 AM (IST)
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प्रशासन ने ही दिया वसूली का लाइसेंस

– विकाश – कोडरमा : चंदवारा प्रंखड में मकानों पर स्थायी नंबर प्लेट लगा कर 25 रुपये वसूलने का मामला प्रकाश में आने के बाद एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. नंबर प्लेट लगाने वाले गिरोह को काम करने के लिए जिला प्रशासन के ही एक विभाग की ओर से लाइसेंस (आदेश […]

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– विकाश –

कोडरमा : चंदवारा प्रंखड में मकानों पर स्थायी नंबर प्लेट लगा कर 25 रुपये वसूलने का मामला प्रकाश में आने के बाद एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने रही हैं. नंबर प्लेट लगाने वाले गिरोह को काम करने के लिए जिला प्रशासन के ही एक विभाग की ओर से लाइसेंस (आदेश पत्र) निर्गत किया गया था.

इसी आदेश पत्र का फायदा उठाते हुए गिरोह के लोगों ने संबंधित बीडीओ से भी आदेश पत्र निकलवा लिया. गिरोह के लोगों ने उप समाहर्ता से लेकर पंचायती राज पदाधिकारी (डीपीआरओ) के यहां से पत्र निकलवाया. इसके बाद प्रखंड स्तर पर पहुंचे.

प्रभात खबर के खुलासे के बाद हड़कंप : नंबर प्लेट लगा कर 25 रुपये वसूले जाने का मामला सामने आने के बाद गिरोह के लोगों के बीच हड़कंप मचा हुआ है. वहीं इस कृत्य में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कुछ अधिकारी मामले को दबाने में लगे हैं.

जिले के चार प्रखंड चंदवारा, डोमचांच, मरकच्चो जयनगर में इस तरह का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है और इसे रोकने के लिए कोई प्रशासनिक पहल नहीं हो रही है.

जैसेजैसे बदला पोस्ट, बदल गया हुक्मनामा : जैसेजैसे अधिकारियों का पोस्ट बदलता गया, आदेश पत्र में लिखी बातों का अर्थ बदलता गया. पहले उप समाहर्ता ने पत्रंक नंबर 433/सां दिनांक 6-6-2013 निकाला.

इसके बाद डीपीआरओ ने पत्रंक नंबर 108/. निकालते हुए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों थाना प्रभारियों को आदेश जारी किया कि इस कार्य में मदद करें. जो पत्र बीडीओ की ओर से जारी किया, उसमें यह साफ लिखा है कि यह कार्य अनिवार्य है. इस नंबर प्लेट के नहीं लगाने से कई जरूरी काम बाधित हो सकते हैं.

सफेद कागज के आवेदन ने निकलवा दिया आदेश : गड़बड़ी का खेल किस स्तर पर हुआ इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. खुद को बोकारो निवासी बताने वाले सुरेन सिंह नामक व्यक्ति ने एक सफेद कागज पर उपायुक्त के नाम से चार जून 2013 को आवेदन देता है. आवेदन में इस बात का उल्लेख करता है कि मैंने कई जिलों में पंचायती राज के प्रचारप्रसार का काम किया है.

इसमें सरकार से किसी भी प्रकार का कोई लेनदेन नहीं होता है. इसमें मकान मालिक से निर्धारित राशि वसूली जाती है. अत: उपायुक्त महोदय से आग्रह है कि जिले में उक्त कार्य करने की अनुमति दी जाये. इसके बाद यह आवेदन उपायुक्त कार्यालय से आगे बढ़ता है और आगे जाकर आदेश पत्र का रूप ले लेता है.

एक महीने बाद ही बदल गया नाम पता : गिरोह की पहुंच देखिए, डीसी को जून में दिये आवेदन में उक्त व्यक्ति खुद को सुरेन सिंह बतता है, पर आठ जुलाई 2013 को जो पत्र जिला पंचायती राज पदाधिकारी के यहां से निर्गत होता हैउसमें उसका नाम सुरेंद्र हो जाता है और पता भी बदल जाता है.

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