मुद्दा एक, पर मोरचा पांच

– राजेशसिंह – – बांझेडीह में पांचवें मोरचा के बाद नयी राजनीति की शुरुआत – समय के साथ बढ़ती जा रही है मोरचा की संख्या – नेताओं में नहीं दिख रही एकजुटता जयनगर : बांझेडीह पावर प्लांट के विस्थापितों व मजदूरों के अधिकार की लड़ाई लड़ने को लेकर गत 13 सितंबर को झामुमो के नेतृत्व […]
– राजेशसिंह –
– बांझेडीह में पांचवें मोरचा के बाद नयी राजनीति की शुरुआत
– समय के साथ बढ़ती जा रही है मोरचा की संख्या
– नेताओं में नहीं दिख रही एकजुटता
जयनगर : बांझेडीह पावर प्लांट के विस्थापितों व मजदूरों के अधिकार की लड़ाई लड़ने को लेकर गत 13 सितंबर को झामुमो के नेतृत्व में बना विस्थापित संघर्ष मोरचा की सभा के बाद प्लांट को लेकर नयी राजनीति की शुरुआत शुरू हो गयी है. अब तक इस मामले से दूर झामुमो भी इस मामले में प्रवेश कर गया है.
झामुमो का प्रवेश भाजपा के गढ़ में हुआ है. सिंगारडीह व डुमरडीहा पहले भाजपा का गढ़ माना जाता था. यहीं से लगभग दो दर्जन लोग झामुमो में शामिल हुए. लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा होने से भाजपा व झाविमो दोनों को नुकसान हो सकता है. इस प्लांट में विस्थापितों के हक व अधिकार को लेकर अब तक पांच मोरचा बन चुके हैं.
इसके पूर्व भाजपा समर्थित विस्थापित संघर्ष समिति मजदूर संघ, झाविमो, कांग्रेस व भाकपा के संयुक्त नेतृत्व में विस्थापित संयुक्त प्रभावित मोरचा, माले समर्थित झारखंड जनरल मजदूर यूनियन व क्रांतिकारी विस्थापित किसान मोरचा का गठन हो चुका है. असंतुष्ट विस्थापित प्रतिदिन एक नया मोरचा बना रहे हैं. इस फूट का सीधा लाभ प्रबंधन को हो रहा है. अब देखना यह है कि कौन सी समिति या मोरचा विस्थापितों के लिए क्या कर पाता है.
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