शिक्षा का चिराग जलाना होगा, जुल्म के खिलाफ आवाज उठानी होगी

Updated at : 09 Mar 2015 2:18 AM (IST)
विज्ञापन
शिक्षा का चिराग जलाना होगा, जुल्म के खिलाफ आवाज उठानी होगी

झुमरीतिलैया : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर क्षेत्र की महिला समाजसेविओं सहित अलग-अलग महिलाओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. महिलाओं का मानना है कि आज के इस आधुनिक युग में महिलाएं शिक्षा के दृष्टिकोण से अपनी भागीदारी को समाज के बीच नहीं ला पायी है. अशिक्षित होने के कारण वे जुल्म सहती है. पार्षद मीता […]

विज्ञापन

झुमरीतिलैया : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर क्षेत्र की महिला समाजसेविओं सहित अलग-अलग महिलाओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. महिलाओं का मानना है कि आज के इस आधुनिक युग में महिलाएं शिक्षा के दृष्टिकोण से अपनी भागीदारी को समाज के बीच नहीं ला पायी है.

अशिक्षित होने के कारण वे जुल्म सहती है. पार्षद मीता सिन्हा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही महिलाएं अपनी अहम भूमिका निभाती रही है, मगर वर्तमान युग में महिलाओं का सर्वागीण विकास अधूरा है.

शिक्षा के क्षेत्र में आज भी महिलाओं का प्रतिशत कम है. उन्होंने कहा कि सामाजिक पहल के तहत लड़कियों को भी लड़कों के अनुरूप वातावरण देने की जरूरत है. कोडरमा की सीडीपीओ साधना चौधरी ने कहा कि अवसर मिले तो महिलाएं वो सब कुछ कर सकती है जो इस समाज के विकास के लिए जरूरी है. बस अपनी ताकत को पहचानने की जरूरत है.

गृहिणी सुजाता देवी ने कहा कि महिलाओं को समाज में पुरुषों के समान अधिकार मिलने की जरूरत है. महिला सशक्तीकरण के अभाव में महिलाएं पिछड़ रही है. समाज का विकास तभी संभव है जब महिलाएं व बालिकाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिले. समाजसेवी लीना देवी ने कहा कि महिलाओं को स्वावलंबी होने की जरूरत है. जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना चाहिए, क्योंकि जुल्म सहना भी अपने आप में अपराध है.

व्यवसायी सुनीती सेठ ने कहा कि महिलाओं को शिक्षित होने से समाज का विकास होगा. इसकी शुरुआत अपने घर से करने की जरूरत है. शिक्षित बालिका दो घरों को संवार सकती है. वहीं समाजसेवी सरिता देवी ने कहा कि जुल्म व अन्याय के खिलाफ महिलाओं को एकजुट होकर संकल्प लेने की जरूरत है. महिलाएं अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर जुल्म व अन्याय का विरोध कर सकती है. उन्होंने कहा कि नारी शक्ति जागेगी, तभी इस देश का विकास होगा. शिक्षिका सीता वर्मा ने कहा कि महिला शोषण में महिलाओं का हाथ सर्वोपरि होता है. इसे बंद करने की जरूरत है.

जब एक महिला दूसरी महिला का शोषण करेगी, तो स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है. पार्षद पिंकी जैन ने कहा कि आज पूरा विश्व नारी शक्ति को पहचान रहा है. ऐसे में अपने घर की बेटियों को हमलोग बेटे जैसी आजादी नहीं दे पाते हैं. इस आधुनिक युग में हम लोग महिला पुरुष की बराबरी की बात तो करते हैं, मगर असल जिंदगी में ऐसा नहीं हो पाता है. इनरह्वील की अध्यक्ष पिंकी खेतान ने कहा कि शिक्षा जगत में महिलाओं की भागीदारी जरूरी है. उन्होंने कहा कि शिक्षित बालिका मायके व ससुराल दोनों के समाज को एक बेहतर पायदान पर ले जा सकती है. शिक्षित महिला ही जुल्म के खिलाफ लड़ने में सक्षम होती है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola