तब के प्रत्याशी और कार्यकर्ता दल-बदलू नहीं होते थे: डिलो साव

चौपारण : प्रखंड के ग्राम मध्यगोपाली निवासी 82 वर्षीय डिलो साव आजादी के बाद से ही वोट देते आ रहे हैं. उनके अनुसार पहले और अभी के चुनाव में काफी फर्क आ चुका है. पहले चुनाव के समय बूथ पर पुलिस की पहरेदारी नहीं होती थी और न ही लड़ाई-झगड़े होते थे. पांच-दस गांव के […]
चौपारण : प्रखंड के ग्राम मध्यगोपाली निवासी 82 वर्षीय डिलो साव आजादी के बाद से ही वोट देते आ रहे हैं. उनके अनुसार पहले और अभी के चुनाव में काफी फर्क आ चुका है. पहले चुनाव के समय बूथ पर पुलिस की पहरेदारी नहीं होती थी और न ही लड़ाई-झगड़े होते थे. पांच-दस गांव के बीच एक बूथ होते थे और लोग उत्साह के साथ मतदान करने पहुंचते थे.
सरकारी भवन नहीं थे. गांव के चौक-चौराहों पर कुरहा में मतदान होता था. कुरहा के बीच में मतपेटी को छुपाकर रखा जाता था, जहां लोग कतारबद्ध व निर्भीक होकर मत डालते थे. उस जमाने में प्रत्याशी भी कम होते थे. तब चुनावी मुद्दा महंगाई ही होता था. उस वक्त पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं कम मतदान करती थीं. चुनाव के समय गांव में चौपाल लगा करता था और किसे वोट देना है, यह निर्णय होता था.
पहले के नेता व कार्यकर्ता दल बदलू नहीं होते थे. गांव के लोग मतदान कर्मियों को गुड़ एवं दही के शर्बत पिलाते थे. प्रचार के लिए एक माइक वाली जीप आती थी, जिसके पीछे बच्चे दौड़ते थे. जीप पर सवार लोग गांव वालों के हाथ में पंपलेट बांटते थे, जिसमें चुनावी वादे लिखे होते थे.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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