कोडरमा में बढ़ रही है आत्महत्या की प्रवृत्ति

Updated at : 27 Jun 2018 4:50 AM (IST)
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कोडरमा में बढ़ रही है आत्महत्या की प्रवृत्ति

तीन दिन में दो नाबालिग समेत चार ने की आत्महत्या कोडरमा बाजार : कोडरमा में इन दिनों आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो चिंताजनक है. यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाये गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है. इसके लिए शासन-प्रशासन के अलावा समाजसेवियों व बुद्धिजीवियों को आगे बढ़ कर इस प्रवृत्ति पर […]

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तीन दिन में दो नाबालिग समेत चार ने की आत्महत्या

कोडरमा बाजार : कोडरमा में इन दिनों आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो चिंताजनक है. यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाये गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है. इसके लिए शासन-प्रशासन के अलावा समाजसेवियों व बुद्धिजीवियों को आगे बढ़ कर इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी उपाय करने होंगे. आंकड़ों के अनुसार मात्र तीन दिन में चार लोगों ने आत्महत्या की है. इसमें से दो बालिग व दो नाबालिग शामिल है. जिले में आत्महत्या के पहले भी कई मामले आ चुके है, परंतु तीन दिनों में चार घटनाएं घटने से हर आम और खास सकते में है. जानकारी के मुताबिक बीते 23 जून को तिलैया थाना क्षेत्र निवासी दिनेश कुमार ने पारिवारिक कलह के कारण सल्फास की गोली खाकर आत्महत्या कर ली.
मृतक पेशे से शिक्षक था और वर्तमान में हजारीबाग जिले के चौपारण थाना क्षेत्र के विद्यालय में पदस्थापित था. वहीं, कोडरमा थाना क्षेत्र अंतर्गत जिला मुख्यालय स्थित कोडरमा बाजार में पिछले दो दिन में दो नाबालिगों ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. इससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गयी है. 24 जून को कोडरमा बाजार के व्यवसायी संजीत वर्णवाल के 14 वर्षीय नाबालिग पुत्र मीसू उर्फ हर्ष कुमार, जबकि 25 जून को बाइपास रोड की एक नाबालिग लड़की ने भी फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. इससे पूर्व पहले तिलैया के गांधी स्कूल रोड निवासी 48 वर्षीय विनोद प्रसाद ने आत्महत्या कर ली थी.
इधर, सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ आशीष कुमार बताते है कि यह काफी गंभीर मामला है. उनके अनुसार वर्तमान समय में जिस प्रकार पढ़ाई के मामले में प्रतिस्पर्धाएं बढ़ी है, उससे बच्चों में तनाव बढ़ रहा है. हम अभिभावक भी भागदौड़ की जिंदगी में अपने बच्चों को अधिक समय दे नहीं पाते है, जिससे बच्चे भी हमसे कटे-कटे रहते है. हम सभी को चाहिए कि 14 से 18 वर्ष के बच्चों के साथ फ्रेंडली बन कर रहें, ताकि वे अपनी समस्याएं साझा कर सकें. जहां तक बड़े लोगों की आत्महत्या की बात है, तो उसमें सबसे बड़ा कारण तनाव को माना गया है. फास्ट फूड, भागदौड़ की जिंदगी, आधुनिकता, विषम खानपान के कारण आज लोग ज्यादा तनाव झेल नहीं पाते है. यह लोगों को समझना होगा कि आत्महत्या एक अपराध है. हमें तनाव में नहीं रहना चाहिए. तनाव से मुक्ति के लिए हर उपाय करना चाहिए.
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