बाल मृत्यु दर कम करने में रोटा वायरस टीका कारगर : सीएस
Updated at : 07 Apr 2018 1:02 AM (IST)
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कोडरमा बाजार : सिविल सर्जन सभागार में शुक्रवार को रोटा वायरस टीका की जानकारी दी गयी. सीएस डाॅ योगेंद्र महतो ने कहा कि बाल मृत्यु दर कम करने में यह टीका काफी कारगर साबित होगा. उन्होंने बताया कि झारखंड में यह टीका डेढ़, ढाई व साढ़े तीन महीने के बच्चों को दी जायेगी. बच्चों को […]
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कोडरमा बाजार : सिविल सर्जन सभागार में शुक्रवार को रोटा वायरस टीका की जानकारी दी गयी. सीएस डाॅ योगेंद्र महतो ने कहा कि बाल मृत्यु दर कम करने में यह टीका काफी कारगर साबित होगा. उन्होंने बताया कि झारखंड में यह टीका डेढ़, ढाई व साढ़े तीन महीने के बच्चों को दी जायेगी. बच्चों को टीका देने का अभियान शुरू करने से पहले स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है.
उन्होंने बताया कि बच्चों की मौत डायरिया से नहीं हो, इसलिए यह जरूरी है कि अधिक से अधिक बच्चों को यह दवा पिलायी जाये. सीएस के अनुसार राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें, तो झारखंड ने शिशु मृत्यु दर पर बेहतर काम किया है. यह टीका सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों स्वास्थ्य उप केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा अन्य सभी केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध होगा. उन्होंने बताया कि टीका देने के बाद बच्चों को उल्टी, खांसी व हल्का बुखार की समस्या आ सकती है.
डीआरसीएच डॉ एबी प्रसाद ने कहा कि दुनिया भर में संयुक्त रूप से एड्स, मलेरिया व खसरा की तुलना में डायरिया से अधिक बच्चों की मृत्यु होती है. डायरिया से करीब 78 हजार बच्चों की मृत्यु भारत में व पांच वर्ष से कम उम्र के 2500 बच्चों की मृत्यु झारखंड में होती है. भारत में रोटा वायरस डायरिया हल्के से लेकर गंभीर डायरिया के 40 प्रतिशत मामले के लिए जिम्मेदार है. डायरिया बच्चों में कुपोषण, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता व बीमारी का एक चक्र बनाता है.
कहा कि रोटा वायरस वैक्सीन की पहली खुराक देने की अधिकतम उम्र एक वर्ष या 12 माह है. यदि बच्चे को 12 माह की उम्र तक रोटा वायरस वैक्सीन की पहली खुराक मिल चुकी हो, तो रोटा वायरस टीकाकरण पूर्ण करने हेतु दो खुराकों में चार सप्ताह का अंतराल रखते हुए अागामी दूसरी व तीसरी खुराक दी जानी है. रोटा वायरस टीका एक सुरक्षित टीका है.
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