पूर्व अंचलाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी व मुखिया पर मामला दर्ज

Updated at : 04 Dec 2017 12:36 PM (IST)
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पूर्व अंचलाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी व मुखिया पर मामला दर्ज

चंदवारा: प्रखंड के तिलैया डैम कांटी में तालाब जीर्णोद्धार कार्य में गड़बड़ी के मामले में पूर्व सीओ नारायण राम, भू संरक्षण पदाधिकारी संतोष प्रसाद गुप्ता, कांटी के मुखिया रमेश प्रसाद सहित कुल नौ लोगों पर केस दर्ज हुआ है. अदालत में स्थानीय व्यक्ति रामचंद्र यादव द्वारा पूर्व में दायर किये गये परिवाद पत्र के आलोक […]

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चंदवारा: प्रखंड के तिलैया डैम कांटी में तालाब जीर्णोद्धार कार्य में गड़बड़ी के मामले में पूर्व सीओ नारायण राम, भू संरक्षण पदाधिकारी संतोष प्रसाद गुप्ता, कांटी के मुखिया रमेश प्रसाद सहित कुल नौ लोगों पर केस दर्ज हुआ है. अदालत में स्थानीय व्यक्ति रामचंद्र यादव द्वारा पूर्व में दायर किये गये परिवाद पत्र के आलोक में तिलैया डैम ओपी में मामला दर्ज हुआ है.

जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उसमें इन लोगों के अलावा विनोद प्रसाद गुप्ता, द्वारिका प्रसाद, विभाग के एसडीओ सुदामा प्रसाद, एसी राम, सहायक अभियंता भोलेनाथ व फील्ड ऑफिसर सुरेश चौधरी शामिल हैं. डैम ओपी प्रभारी कन्हाई सिंह ने बताया कि परिवाद पत्र के आलोक में कांड संख्या 270/17 धारा 120 बी, 166, 167, 406, 420, 409, 467, 468, 471 दर्ज किया गया है. पुलिस अब मामले की जांच करेगी. जानकारी के अनुसार कांटी के तेतरटांड तालाब में भूमि संरक्षण विभाग द्वारा लाखों रुपये से तालाब जीर्णोद्धार का कार्य किया गया था. कार्य के बाद स्थानीय लोगों का आरोप था कि योजनास्थल पर कार्य नहीं किया गया है.

शिकायत दर्ज कराने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी. यही नहीं मामले की शिकायत मुख्यमंत्री जन शिकायत कोषांग में भी की गयी है. आरोप यह भी था कि तालाब जीर्णोद्धार कार्य के लिए जो भूमि प्रतिवेदन दिया गया है, उसमें छेड़छाड़ कर फर्जीवाड़ा किया गया है. शिकायत कर्ता रामचंद्र यादव का कहना था कि भूमि संरक्षण एवं जलछाजन विभाग द्वारा बंजर भूमि विकास योजना मद से तेतरटांड तालाब निर्माण की योजना में सुनियोजित साजिश के तहत फर्जीवाड़ा व सरकारी नियमों की अनदेखी कर पैसे की बंदरबांट की गयी है.
योजना स्थल पर काम नहीं कर करीब 16 लाख 85 हजार की निकासी 26 सितंबर 2017 को कर ली गयी है. आरोप यह भी है कि योजना समिति के लाभुक में जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदार शामिल हैं. रैयती जमीन पर भी कार्य का आरोप था.

भूमि प्रतिवेदन में फर्जीवाड़ा की शिकायत लोगों का यह भी आरोप था कि तालाब जीर्णोद्धार को लेकर भूमि प्रतिवेदन प्राप्त करने के लिए मुखिया ने रैयती जमीन को गैरमजरूआ खाता का प्लॉट दिखा कर अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने का काम किया है. इससे पहले मुखिया ने सीओ के समक्ष आवेदन देकर खाता नंबर 262 पर स्थित प्लॉट नंबर 3558, 3557, 3546, 3558, 3559, 3561, 3547, 3548, 3550,3551 व 3552 गैरमजरूआ किस्म की जमीन का जिक्र करते हुए इस पर तालाब निर्माण कार्य का भूमि प्रतिवेदन मांगा था, पर आरोप है कि प्रतिवेदन में वास्तविक रकबा को बढ़ा कर तालाब निर्माण के लिए भूमि प्रतिवेदन दे दिया गया. खाता नंबर 262, प्लांट नंबर 3557 का खतियानी रकबा मात्र नौ डीसमिल है, जिसे प्रतिवेदन में 1.09 एकड़ व प्लांट नंबर 3559 के वास्तविक रकबा पांच डिसमील को बढ़ाकर 95 डिसमील प्रतिवेदित किया गया है.

यही नहीं भूमि प्रतिवेदन के लिए दिये गये आवेदन में प्लॉट नंबर 3546 खाता नंबर 262 गैरमजरूआ खाता की जमीन का जिक्र है, जबकि प्लॉट नंबर 3546 रैयती खाता संख्या 178 की रैयती जमीन है. लोगों ने इस पर भी सवाल उठाया था कि भूमि प्रतिवेदन में न तो हल्का कर्मचारी और न ही अंचल निरीक्षक की जरूरत महसूस की गयी है. सीधा अंचल अधिकारी स्तर से प्रतिवेदन समर्पित कर दिया गया है, जो नियमानुसार नहीं है. हालांकि उस समय मुखिया ने तमाम आरोपों को खारिज कर दिया था.
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