बात का समय खत्म, अब सवालों का दौर
Updated at : 13 Oct 2017 12:33 PM (IST)
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भाजपा व मोदी के शासन को विफल करार देते हुए आंदोलन की रूपरेखा हुई तैयार जन सवालों को लाठी, गोली व धमकी से दबाने का हो रहा प्रयास : दीपांकर कोडरमा : देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही भाजपा सरकार द्वारा कही जा रही मन की बात का अब समय खत्म हो […]
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भाजपा व मोदी के शासन को विफल करार देते हुए आंदोलन की रूपरेखा हुई तैयार
जन सवालों को लाठी, गोली व धमकी से दबाने का हो रहा प्रयास : दीपांकर
कोडरमा : देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही भाजपा सरकार द्वारा कही जा रही मन की बात का अब समय खत्म हो गया है, अब दौर जनता के सवालों का है. बेरोजगारी, पलायन, गरीबी के सवाल के साथ ही किसानों व अर्थव्यवस्था की स्थिति ने सबको सोचने के लिए मजबूर किया है, तो इन सबके बीच अब जन आंदोलन ही एक मात्र विकल्प है.
ये मानना है भाकपा माले केंद्रीय कमेटी के नेताओं का. झुमरीतिलैया के वृंदा भवन में केंद्रीय कमेटी की बैठक के दूसरे दिन कई मुद्दों पर चर्चा करते हुए आगे की रणनीति बनायी गयी. खासकर झारखंड व केंद्र सरकार को घेरने के लिए निर्णय लिये गये. इसके अलावा मार्च में पंजाब में आयोजित पार्टी के दसवें महाधिवेशन को सफल बनाने, ट्रेड यूनियनों, मजदूरों के प्रदर्शन को साथ देने, किसान संघर्ष समन्वय समिति की किसान मुक्ति यात्रा को सफल बनाने पर विचार-विमर्श हुआ.
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पार्टी के केंद्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि झारखंड से लेकर देश में सरकार पूरी तरह निकम्मी व जन विरोधी, किसान विरोधी साबित हुई है. आज भाजपा, मोदी व शाह तीनों जनता के सवालों के घेरे में है. सरकार का दोहरा चरित्र सबके सामने आ गया है. अब जनता सवाल पूछ रही है, तो सरकार को जवाब देना होगा. भाजपा ने जो कहा था हो उससे उलट रहा है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले भाजपा के शासन में बीएचयू में छात्राओं पर पुरुष पुलिसकर्मी लाठी चलाते हैं.
भाजपा नेता अपने बेटों को बचाने में उतर आते हैं. पहले हरियाणा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के बेटे विकास वडाला को छेड़छाड़ के मामले में बचाने के लिए सभी सामने आये तो अब अप्रत्याशित रूप से अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी के एक साल में 16 हजार गुणा पूंजी बढ़ोतरी का मामला सामने आने पर रेल मंत्री से लेकर अन्य नेता तब बचाव में उतर आये हैं.
भाजपा का न खाऊंगा न खाने दूंगा की बात पूरी तरह फेल साबित हुई है. यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी जैसे भाजपा नेताओं ने अपने लेख में अर्थव्यवस्था की हकीकत बतायी है. ये सरकार जन सवालों को लाठी, गोली व धमकी के बल पर दबाना चाहती है. ऐसे में किसान, नौजवान, आदिवासी हितों के सवाल पर व्यापक जन आंदोलन होगा. जनता चुनाव में अपना बदला लेगी. ज्ञात हो की तीन दिवसीय यह बैठक 13 अक्तूबर तक चलेगी. बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 59 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. गुरुवार को राजधनवार के विधायक राजकुमार यादव भी बैठक में पहुंचे.
नौजवान रोजगार देंगे, तो पूंजीपति क्या करेंगे
दीपांकर ने कहा कि अस्पतालों में बच्चों की मौत पर भी भाजपा की संवेदना, गंभीरता नहीं दिखी. सरकार ने रोजगार देकर पलायन रोकने का वादा किया था, पर अब बेरोजगार नौजवानों पर रोजगार पैदा करने की जिम्मेदारी स्टार्ट अप इंडिया जैसे नये शगूफा छोड़कर दिये जा रहे हैं. अगर नौजवान रोजगार देंगे, तो पूंजीपति क्या करेंगे. उन्होंने कहा कि झारखंड में रघुवर सरकार के द्वारा कंपनियों के साथ एमओयू सिर्फ जमीन हड़पने के लिए हो रहा है.
11 नवंबर को रांची में जन विकल्प रैली
बगोदर के पूर्व विधायक विनोद सिंह ने बताया कि बैठक में 11 नवंबर को रांची में जन विकल्प रैली करने का निर्णय हुआ है. उन्होंने कहा कि रघुवर सरकार ने एक हजार दिन पूरा होने का जश्न मनाया है, पर झारखंड मोमेंटम के नाम पर पूंजीपतियों के लिए सिर्फ कालीन बिछाने का काम हुआ है.
हवा में कुछ कंपनियों से करार हुए हैं, इसकी सच्चाई अब सामने आ रही है. उन्होंने वर्तमान सरकार को लूट की सरकार बताते हुए कहा कि दूसरे राज्यों में सौर ऊर्जा से बिजली देने को लेकर दो रुपये से लेकर ढाई रुपये प्रति यूनिट का करार हुआ है, पर यही करार झारखंड में एक कंपनी से चार रुपये प्रति यूनिट से ऊपर देने का किया गया है.
राज्य में पिछले कुछ माह में एक दर्जन किसानों ने आत्म हत्या कर ली है, सरकार बदलाव के दावे कर रही है. विनोद ने कोडरमा के सांसद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यहां के लोगों के अच्छे दिन तो आए नहीं. लोगों में निराशा है. क्षेत्र में पलायन बढ़ा है. सांसद एक अदद यात्री ट्रेन भी लोगों के लिए नहीं चलवा पाते, जबकि इसी पटरी पर माल गाड़ियां बढ़ गयी है.
साजिश के तहत वामपंथ को निशाना बना रहे हैं
दीपांकर ने कहा कि भाजपा व आरएसएस अब एक सोची समझी साजिश के तहत वामपंथ को निशाना बना रहे हैं. केरल में योगी आदित्य नाथ व अमित शाह ने उन्माद बढ़ाने का काम किया है. अब वामपंथी दलों के दफ्तरों, नेताओं पर हमले हो रहे हैं. देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास हो रहा है. वैचारिक, सांस्कृतिक धरातल पर भाईचारा, एकता व जन अधिकार को लेकर अब आंदोलन ही विकल्प है.
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