धनरोपनी पूरी होने को, मक्का व मडुआ की फसल में आयी जान

Updated at : 31 Jul 2017 12:57 PM (IST)
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धनरोपनी पूरी होने को, मक्का व मडुआ की फसल में आयी जान

जयनगर. प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र में किसान सब काम छोड़ कर पर धनरोपनी में लगे है. इससे ग्रामीण चौक-चौराहों पर सन्नाटा छाया रह रहा है. लोग खेतों में नजर आ रहे है. रोपनी की रफ्तार ऐसी है कि कंद्रपडीह, लाराबाद, हिरोडीह, सिंगारडीह, डुमरडीहा, चमगुदोखुर्द, चमगुदोकला, बिरसोडीह, सोनपुरा, बिसोडीह, चुटियारो, कांको, बिगहा, धरेयडीह, घंघरी आदि गांवों […]

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जयनगर. प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र में किसान सब काम छोड़ कर पर धनरोपनी में लगे है. इससे ग्रामीण चौक-चौराहों पर सन्नाटा छाया रह रहा है. लोग खेतों में नजर आ रहे है. रोपनी की रफ्तार ऐसी है कि कंद्रपडीह, लाराबाद, हिरोडीह, सिंगारडीह, डुमरडीहा, चमगुदोखुर्द, चमगुदोकला, बिरसोडीह, सोनपुरा, बिसोडीह, चुटियारो, कांको, बिगहा, धरेयडीह, घंघरी आदि गांवों में धनरोपनी पूरा होने को है. इन क्षेत्रों में अब मक्का, मडुआ व सुरगुजा व मूंगफली की फसलों में जान आ गयी है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसानों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती खेतों में पानी को रोक कर रखना है, तभी धनरोपनी सफल हो पायेगी. फिलहाल खेतों का नजारा देखने लायक है. कहीं बिहन उखाड़े जो रहे है, तो कहीं मंगलगीत के साथ महिलाएं धनरोपनी कर रही है. इन दिनों किसान खेतों में खाना खा रहे है. सड़क पर खाना लेकर खेत की ओर जाती महिलाएं दिखाई दे रही है. रविवार को सिंगारडीह निवासी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश यादव बैलगाड़ी से धान का बिहन ले जाते दिखे.

ट्रैक्टर के जमाने में भी बैलगाड़ी देखने को मिल रही है. श्री यादव ने बताया कि लगभग रोपनी पूरी हो चुकी है. शेष बचे खेतों में रोपनी जारी है. बैलगाड़ी से बिहन ले जाने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हर जगह ट्रैक्टर नहीं जा सकता है, जबकि बैलगाड़ी कहीं भी जा सकती है. कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में एक कहावत है कि जहां न जाये मालगाड़ी वहां जाये बैलगाड़ी.

किसानों ने कहा, भगवान इंद्र की कृपा: खेतीबाड़ी की वर्तमान स्थिति पर किसानों ने बातचीत के दौरान अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भगवान इंद्र की कृपा बताया. चुटियारों के किसान भरत साव व मितलाल साव ने कहा कि टूटती उम्मीद फिर से कायम हो गयी है. यह भगवान इंद्रदेव की कृपा है. सिंगारडीह के किसान अर्जुन यादव ने कहा कि अब चावल की चिंता दूर हो गयी है. डुमरडीहा के किसान मुन्ना यादव ने कहा कि शुरुआत में ऐसा लगता था कि इस वर्ष रोपनी नहीं हो पायेगी. मगर देर आये, दुरुस्त रहे की स्थिति रही. कंद्रपडीह के किसान पप्पू साव ने कहा कि खेती की हालत चिंतित करने वाली थी, मगर वह चिंता दूर हो गयी है. चरकी पहरी के किसान सुनील यादव ने इसे ईश्वर की कृपा बताते हुए कहा कि निराश किसानों के लिए बरसात वरदान साबित हुआ है.

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