निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना ही महिला सशक्तीकरण : मंत्री

Published by : SATISH SHARMA Updated At : 23 Mar 2025 4:49 PM

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आदिवासी महिला मंच की ओर से महिला विकास केंद्र तोरपा में वार्षिक महिला उत्सव का आयोजन रविवार को किया गया.

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महिला विकास केंद्र तोरपा में वार्षिक महिला उत्सव मना

प्रतिनिधि, तोरपा

आदिवासी महिला मंच की ओर से महिला विकास केंद्र तोरपा में वार्षिक महिला उत्सव का आयोजन रविवार को किया गया. मुख्य अतिथि कृषि, पशुपालन व सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और सांसद सुखदेव भगत ने कार्यक्रम का उदघाटन किया. मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की ने कहा कि आदिवासियों कि संस्कृति और परंपरा 65 हजार साल पुरानी है. आज जिस संस्कृति और परंपरा को बचाने की बात करते हैं, इसको आज गांव की दीदियों ने बचाकर रखी है. शहरों में यह परंपरा देखने को नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों के पास जो ज्ञान था, उस पर आज के लोग शोध कर हैं. हमारे पुरखों को लिखना-पढ़ना नहीं आता था. इसलिए उनके ज्ञान का डॉक्यूमेंटेशन नहीं हो पाया है. हमारा समाज गरीब नहीं हमेशा से संतुष्ट समाज रहा है. हमारे आसपास जो चीजें हैं उसी से अपनी जरूरत पूरा कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि महिला व दीदियों का बड़ा योगदान समाज के विकास में है. हम महिलाओं को यह संकल्प लेना चाहिए कि एक-दूसरे को नीचा नहीं दिखायेंगे. उन्होंने कहा कि महिलाओं को संगठित कर एफपीओ बनाकर काम करें. अच्छा एफपीओ को 15 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है. इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन में इच्छा रखने वाली दीदियों की सूची दें. उन्हें योजना का लाभ दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि झारखंड में मोती उत्पादन की भी ट्रेनिंग दी जा रही है. लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि महिलाओं को शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उनमें निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना ही महिला सशक्तीकरण है. उन्होंने कहा कि महिलाएं घर व समाज को संवारती हैं. उन्होंने कहा कि डायन जैसी कुप्रथा व नशापान समाज को खोखला कर रही है. इसे दूर करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जल, जंगल जमीन, हमरा नारा नहीं संकल्प है इसके लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे. कार्यक्रम में वासवी किड़ो ने कहा कि आदिवासियों के ज्ञान व परंपरा को संरक्षित, सुरक्षित व प्रोत्साहित करने की जरूरत है. ट्राइबल इंडिजिनस सिस्टम व मेडिसिन को बचाने की जरूरत है. कार्यक्रम में महिलाओं ने आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया. महिलाओं की ओर से तैयार उत्पाद का स्टाॅल भी लगाया गया था. इस अवसर पर महिलाओं ने बीज पदयात्रा भी निकाली. स्वागत भाषण सिस्टर मरियलेना, संचालन मनीषा ने किया. मौके पर सलोनी प्रिया, ओडिशा से आयी अनुराधा, डॉ दीपक राय, प्रमुख रोहित सुरीन, उपप्रमुख संतोष कर, सुखराम पाहन, सुशांति कोनगाड़ी, सोफिया सुल्ताना, स्नेहलता कंडुलना, रिया लुगुन, शिशिर तोपनो, अनास्तासिया आइंद, जॉन तोपनो, विनीता नाग, आगाथा भेंगरा आदि उपस्थित थे.

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