खूंटी के कर्रा में एनई होरो की मनाई गई शताब्दी जयंती, गोविंदपुर मिशन चौक में पत्थरगड़ी

पत्थरगड़ी के बाद उपस्थित अतिथि. फोटो: प्रभात खबर
Khunti News: खूंटी के कर्रा प्रखंड में एनई होरो की शताब्दी जयंती धूमधाम से मनाई गई, जहां पारंपरिक पत्थरगड़ी अनुष्ठान भी हुआ. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने उनके योगदान को याद करते हुए आदिवासी अधिकार, जल-जंगल-जमीन और एकता के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
कर्रा से सगीर अहमद की रिपोर्ट
Khunti News: झारखंड के खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर मिशन चौक में मंगलवार को स्वर्गीय एनई होरो की शताब्दी जयंती धूमधाम से मनाई गई. इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे. कार्यक्रम का आयोजन पूरी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया, जिसमें आदिवासी संस्कृति की झलक साफ देखने को मिली.
आदिवासी परंपरा के अनुसार हुई पत्थरगड़ी
एनई होरो की स्मृति में पत्थरगड़ी की गई, जो आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है. विभिन्न गांवों से आए पहानों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर इस अनुष्ठान को संपन्न कराया. इसके बाद अतिथियों और उपस्थित लोगों ने उनकी प्रतिमा और पत्थरगड़ी स्थल पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की.
मुख्य अतिथियों ने किया नमन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खूंटी धर्मप्रांत के बिशप मोडिएटर मार्शल केरकेट्टा शामिल हुए. वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया की धर्मपत्नी अनिता कंडुलना और समाजसेवी दयामनी बारला मौजूद रहीं. सभी अतिथियों ने स्वर्गीय एनई होरो को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया.
हक और पहचान की लड़ाई का दिया संदेश
बिशप मार्शल केरकेट्टा ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड गोमके एनई होरो ने समाज को अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया. उन्होंने लोगों से उनके दिखाए मार्ग पर चलने की अपील की. अनिता कंडुलना ने कहा कि होरो ने जल, जंगल और जमीन को पहचान का आधार बनाया और लोगों को एकजुट कर आंदोलन को मजबूत किया.
झारखंड आंदोलन के भीष्म पितामह थे होरो
समाजसेवी दयामनी बारला ने कहा कि एनई होरो को झारखंड आंदोलन का भीष्म पितामह कहा जाता है. उन्होंने अपने संघर्ष और नेतृत्व से आंदोलन को नई दिशा दी. उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. इस दौरान उनके साथी जोन पाहन ने भी उनके जीवन और आंदोलन से जुड़े अनुभव साझा किए.
राजनीतिक और सामाजिक जीवन पर चर्चा
एनई होरो के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वे दो बार खूंटी लोकसभा क्षेत्र से सांसद और सात बार विधायक चुने गए थे. उन्होंने अपने पूरे जीवन को समाज और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित कर दिया.
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया, ज्योत्सना केरकेट्टा, भीमसेंट संगा, नामजन होरो, नेलेन होरो, एस बारला, शिबू होरो, पूनम बारला, सुनीता चोचा, मीणा देवी, पादरी बीके भेंगरा, डॉ हेमंत तोपनो सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
इसे भी पढ़ें: बोकारो के नावाडीह में दो मोटरसाइकिलों की जोरदार टक्कर, दो की मौत दो घायल
आदिवासी पहचान और एकता का प्रतीक आयोजन
यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं था, बल्कि आदिवासी समाज की एकता, परंपरा और पहचान का प्रतीक भी रहा. एनई होरो के विचारों और संघर्षों को याद करते हुए लोगों ने उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लिया.
इसे भी पढ़ें: धनबाद में जोरदार धमाका और कई घर जमींदोज, एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Kumarvishwat Sen
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










