किसानों की हरी सब्जियों से लाल हो रहे हैं बिचौलिये और साहूकार

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Bundu News

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Bundu News: रांची के बुंडू प्रखंड के दलकीडीह और जामटोला गांव में सालोंभर हरी सब्जियों की बंपर पैदावार के बावजूद किसान बेबस हैं. बिचौलियों के वर्चस्व और सरकारी कोल्ड स्टोरेज न होने के कारण किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे तरबूज और कद्दू खेतों में सड़ने को मजबूर हैं. पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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आनंद राम महतो, बुंडू: बुंडू प्रखंड मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर दलकीडीह और जामटोला गांव सब्जी की खेती के लिए प्रसिद्ध है. यहां के 95 फीसदी किसान सब्जी की खेती करते हैं. खेती-किसानी के लिए विख्यात इस गांव से गर्मी, बरसात या सर्दी का मौसम में भी सालोंभर प्रतिदिन एक ट्रक से अधिक हरी सब्जी की पैदावार खेतों से बिक्री के लिए बाजार भेजे जाते हैं. लेकिन दुखद पक्ष यह है कि हाड़तोड़ मेहनत, पूंजी और कार्य कुशलता लगाने के बाद भी यहां के किसानों को उचित मूल्य मयस्सर नहीं हो पाता है. इधर, मौसम की मार से गांव के किसानों की स्थिति और विकट हो गयी है. दलकीङह गांव के निवासी मानसून कोइरी ने कद्दू और तरबूज खेती की है. कद्दू की कीमत सात रुपये मिल रही है, जबकि लगातार बारिश होने के कारण तरबूज खेत में ही सड़ने लगा है. इसी गांव के किसान प्रदीप महतो, फागु लोहारा, तेजू मुंडा ने नेनुआ झिंगी, करेला की खेती की है, लेकिन उसे लागत मूल्य की वसूली नहीं हो रही है. जामटोला गांव के निवासी कन्हाई महतो, उत्तम कुमार महतो, नीलकंठ महतो, जोगिंदर उरांव, धनवा उरांव आदि किसानों का कहना है कि बाजार में जहां पर छोटे व्यापारियों का वर्चस्व है, जो काफी कम कीमत देते हैं. इससे लागत मूल और मेहनत का खर्च वसूली नहीं हो पा रहा है. ये बिचौलिये और साहूकार हमारी सब्जी करीद कर ज्यादा मुनाफा में बेच कर ज्यादा कमाते हैं. छोटे व्यापारियों के वर्चस्व के कारण बड़े-बड़े सब्जी व्यापारी गांव के हाट-बाजार में नहीं आ पाते हैं, जिस कारण किसानों को मेहनत और लागत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. इन गांवों में लगातार सब्जी उत्पादन के बाद भी सरकार का कोई कोल्ड स्टोरेज नहीं है, जहां पर सब्जी के पैदावार को सुरक्षित स्टोर किया जा सके. लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार किसानों ने कोल्ड स्टोरेज निर्माण करने की मांग की है.

हरी सब्जियों की लगातार गिर रही कीमत

बुंडू सहित पांच परगना क्षेत्र के हाट बाजार में हरी सब्जियों की दर में लगातार गिरावट दिख रही है. यहां भिंडी 10 रुपये किलो, कद्दू सात रुपये किलो, नेनुवा 10 रुपये किलो, बोदी छह रुपये किलो, करेला 15 रुपये किलो, झिगी 13 रुपये किलो, टमाटर 30 रुपये किलो, हरी मिर्च 50 रुपये किलो, कोदिमा सात रुपये किलो, तरबूज पांच रुपये किलो, प्याज 12 रुपये किलो, लहसुन 80 रुपये किलो, अदरक 70 रुपये किलो, आलू 10 से 12 रुपये किलो, मूली 15 रुपये किलो, पपीता सात रुपये किलो, खीरा 10 रुपये किलो, लाल साग सात रुपये किलो, आम 10 रुपये किलो, मकई 12 रुपये किलो, कुंदरी 15 रुपये किलो.

स्लग :::: क्षेत्र में हरी सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज नहीं होने से बढ़ी परेशानी

बुंडू के दलकीडीह और जामटोला से प्रतिदिन एक ट्रक से अधिक सब्जी की पैदावार, लेकिन किसानों लागत मूल्य भी मयस्सर नहीं

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Anand Ram Mahto

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