गरमी से परेशान लोगों को बारिश से मिली राहत

Updated at : 16 Jul 2013 1:41 PM (IST)
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गरमी से परेशान लोगों को बारिश से मिली राहत

खलारी : भीषण गरमी से परेशान कोयलांचल के लोगों को बारिश से बहुत राहत मिली. खुशनुमा मौसम आनंद लेने के लिए लोग घर से बाहर निकल आये. बारिश के कारण ट्रांसपोर्टिग रोड पर धूल नहीं उड़ी, जिससे डंपर चालक व आसपास रहनेवाले लोग खुश दिखे. इधर, जल जमाव के कारण हॉल रोड कीचड़ में तब्दील […]

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खलारी : भीषण गरमी से परेशान कोयलांचल के लोगों को बारिश से बहुत राहत मिली. खुशनुमा मौसम आनंद लेने के लिए लोग घर से बाहर निकल आये. बारिश के कारण ट्रांसपोर्टिग रोड पर धूल नहीं उड़ी, जिससे डंपर चालक व आसपास रहनेवाले लोग खुश दिखे.

इधर, जल जमाव के कारण हॉल रोड कीचड़ में तब्दील हो गया. सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. खलारी ओवर ब्रिज से सटी सड़क पानी में डूब गयी. मसजिद मुहल्ला निवासी रशीद व जहीर के घर में पानी घुस गया.

तापमान में गिरावट : पिपरवार

रविवार की दोपहर हुई झमाझम बारिश से तापमान में काफी गिरावट आ गयी. शाम पांच बजे क्षेत्र का तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. मालूम हो कि पिछले एक सप्ताह से यहां का तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास था. सुबह 10 बजे के बाद से ही सड़कें वीरान हो जाती थीं. इधर, बारिश होने के बाद चौक -चौराहों पर काफी चहल-पहल देखी गयी.

आम के लिए वरदान : डकरा

रविवार की दोपहर हुई बारिश कोयलांचल के लोगों के लिए राहत लेकर आयी. बारिश होने से मैक्लुस्कीगंज के आम के व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी. उनका कहना है कि बारिश से आम में मिठास आ जायेगी. काफी समय से क्षेत्र के व्यापारी इसी बारिश का इंतजार कर रहे थे. इधर, गरमी से परेशन बच्चे बारिश शुरू होते ही बच्चे घरों से बाहर निकल आये.

एनके एरिया में बेचैनी : डकरा

मॉनसून की अंगड़ाई के साथ ही एनके एरिया के कोयला खदानों में बेचैनी बढ़ गयी है. यह बेचैनी मॉनसून पूर्व कोयला खानों में की जानेवाली तैयारी के शुरू नहीं होने से हुई. पिछले साल भी क्षेत्र ने काफी कम कोयला उत्पादन किया था.

चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही एक बार फिर एरिया संकट में है. ऐसे में बगैर मॉनसून पूर्व तैयारियों के साथ बरसात में काम करना पड़े, तो कोयला उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.

ज्ञात हो बरसात में कोयला खानों में फिसलन बढ़ जाती है. जिससे उत्पादन प्रभावित होता है. खानों में फिसलन न हो, हॉल रोड सही सलामत रहे इसकी तैयारी मॉनसून पूर्व की जाती है. इसके लिए मुख्यालय द्वारा अलग से फंड दिया जाता है.

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