– जामताड़ा प्रखंड के केलाही में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी फोटो – 13 कथा सुनाते कथावाचक , 14 उपस्थित श्रद्धालु संवाददाता, जामताड़ा जामताड़ा प्रखंड के केलाही गांव स्थित काली मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है. कथा के दूसरे दिन वृंदावन के कथावाचक स्वामी हंसानंद गिरी जी महाराज ने भक्तों को श्रीमद्भागवत के गूढ़ रहस्य व महत्व से अवगत कराया. कहा कि कलयुग में भगवान के भजन से ही भक्ति की पुष्टि होती है. भजन और स्मरण ही ऐसा माध्यम है जो मनुष्य को भगवान से जोड़ते हैं. कहा कि यह मृत्यु लोक कर्म का क्षेत्र है. यहां जो भी आता है, वह अपने पूर्व जन्मों के कर्म का फल भोगता है और नये कर्मों का बीज बोता है. इसलिए, अच्छे कर्म ही मनुष्य के उद्धार का मार्ग हैं. स्वामी ने राजा परीक्षित और श्री सुखदेव महाराज के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिमान और अहंकार के कारण ही परीक्षित को श्राप मिला, किंतु गुरु के आशीर्वाद से उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया. यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि जीवन में सद्गुरु का सान्निध्य अत्यंत आवश्यक है, तभी मनुष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है. उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन को दिशा देने वाला अद्भुत ग्रंथ है, जो मनुष्य को धर्म, ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है. बताया कि व्यास जी महाराज ने 18,000 श्लोकों की रचना कर इस ग्रंथ को अमर बनाया. इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, महाभारत के प्रसंगों और पांडवों की कथा के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है. कथा के दौरान “जीवन मेरा धन्य हुआ गुरु के दर्शन पाने से ” मधुर भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे. वातावरण हरिनाम संकीर्तन से गूंज उठा. महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति में लीन दिखाई दीं. कथावाचक ने कहा कि जब तक मनुष्य अपने अंदर के अहंकार को नहीं त्यागता, तब तक उसे भक्ति का सच्चा आनंद नहीं मिल सकता. उन्होंने समझाया कि भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अपने कर्म, वाणी और विचारों को भगवान के प्रति समर्पित करना है. स्वामी जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक दीपक अंधकार को दूर करता है, वैसे ही भागवत कथा मनुष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार मिटाती है. भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें यह सिखाती हैं कि सत्य, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने से ही जीवन सार्थक होता है. महाभारत के कई प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि पांडवों के संघर्ष और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में समाज के लिए कई शिक्षाएं छिपी हैं. मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है. इसमें वेद, उपनिषद, पुराण और जीवन के सभी तत्वों का सार निहित है.
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